August 30, 2025

आदिवासी छात्रावास में लहसुन-प्याज बंद, धार्मिक पोस्टरों से पढ़ाई बाधित – जर्जर भवन में 20 की जगह 30 बच्चे रहने को मजबूर।

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आजाद भारत न्यूज़ लाइव-बिलासपुर/कोटा। विकासखंड कोटा के प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास, खोंगसरा में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, बिलासपुर के अधीन संचालित इस छात्रावास में अधीक्षक जी.एल. रात्रे द्वारा बैगा आदिवासी बच्चों के भोजन से लहसुन और प्याज पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार अधीक्षक एक धार्मिक संस्था से जुड़े हैं, जहां मांसाहार व कुछ खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध है। उन्होंने छात्रों के भोजन में भी यही नियम लागू कर दिया, दावा करते हुए कि “लहसुन-प्याज से बीमारी होती है”। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों को प्रोटीन व आवश्यक खनिज तत्वों की कमी का खतरा है, जो उनके शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

धार्मिक व उटपटांग पोस्टर से पढ़ाई में बाधा-

छात्रावास में पाठ्यपुस्तकों और शैक्षिक चार्ट की जगह धार्मिक व विचित्र संदेशों वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें “ठ – ठोकर खाकर ठाकुर बनते हैं”, “द – दिलाराम बाप को दिल में समा लो”, “श – शीतला देवी बनो”, “ढ – ढिंढोरा पीटो, परमात्मा आ चुके हैं”, “व – वाह बाबा वाह, ड्रामा करो” जैसे संदेश शामिल हैं।
छात्र बताते हैं कि इस तरह की सामग्री से वे भ्रमित हो रहे हैं और नियमित पढ़ाई पर ध्यान नहीं लग पा रहा।

31 अक्टूबर 1987 से अब तक मरम्मत नहीं – जर्जर भवन में खतरे के बीच रहना मजबूरी

इस छात्रावास का उद्घाटन 31 अक्टूबर 1987 को मध्यप्रदेश विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने किया था। तब से आज तक भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं हुआ।
भवन में बड़े-बड़े छेद, दीवारों में दरारें और गिरने की स्थिति है, फिर भी 30 आदिवासी बच्चे यहाँ रहने को मजबूर हैं। ये बच्चे 15-20 किलोमीटर दूर, कई नदी-नाले और जंगल पार करके यहां आते हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों में आक्रोश

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह बच्चों के अधिकारों का हनन है और विभाग को तुरंत छात्रावास को सुरक्षित जगह शिफ्ट करना चाहिए। साथ ही, दोषी अधिकारियों और अधीक्षक पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

अधीक्षक-जी.एल. रात्रे-  मैं बच्चों को तामसी भोजन से दूर कर उन्हें अच्छी आत्मा का इंसान बना रहा हूँ। लहसुन प्याज से किसका भला हुआ है। और बाकी पोस्टर से ध्यान केंद्रित करता हूँ।आदिवासी बच्चों में क़ई बुरी आदतें भी आ गयी है। जिसे हटाने की जरूरत है।

जनपद सदस्य-कांति बलराम मरावी- बार-बार अधीक्षक को समझाने के बाद भी वह नही समझते हैं। मैं खुद जाकर उन्हें लहसुन प्याज के उपयोग के लिए आग्रह किया था। वह आदिवासी बच्चों को अलग धार्मिक ज्ञान देते है। जो अच्छा नही है।इसकी शिकायत आदिवासी आयुक्त से करूंगा।

मंडल अध्यक्ष- राजू सिंह राजपूत- राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रो के साथ इस तरह के भोजन में भेदभाव की सूचना मिली है। जो नियम विरूद्ध है। इसकी जांच कर कार्यवाही की मांग करूंगा। साथ ही नए बालक छात्रावास की मांग की जाएगी।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मांगें:

1. छात्रावास को सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाए।

2. बच्चों के भोजन में लहसुन-प्याज व अन्य आवश्यक पोषण पुनः शुरू हो।

3. धार्मिक/गैर-शैक्षिक सामग्री हटाकर NCERT मानक की शैक्षिक सामग्री लगाई जाए।

4. अधीक्षक और जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय जांच व कार्रवाई हो।

वीडियो देखें- https://youtu.be/WgSLUogA4RI?si=G50rmviGe-fAYB7P

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