कोटा विधानसभा के ग्रामो में अच्छी सड़क कब? बिटकुली से करवा मार्ग बना मौत का रास्ता: 3 फीट गहरे गड्ढों में फंसी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, कोटा के ग्रामीण परेशान।
कोटा/बेलगहना। आजाद भारत न्यूज़ विशेष रिपोर्ट-
कोटा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। बिटकुली से टेंगनमाड़ा होते हुए करवा तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क आज बदहाल हालत में है। जगह-जगह बने गड्ढों ने इस मार्ग को खतरनाक बना दिया है। ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा — “यह अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना नहीं, गड्ढा सड़क योजना बन चुकी है।”

3 फीट गहरे गड्ढे, पानी से भरे तालाब जैसे गड्ढे
मुख्यमार्ग से भीतर के पंचायतों को जोड़ने वाली यह सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। टेंगनमाड़ा स्टेशन के पास का एक गड्ढा अब छोटे तालाब जैसा बन गया है, जिसमें आसपास के गांवों का बरसाती पानी जमा हो रहा है। यह गड्ढा इतना गहरा है कि दोपहिया वाहन फिसलकर गिर रहे हैं और चारपहिया वाहन चालकों को दूसरी दिशा से घूमकर जाना पड़ता है।

स्कूल के बच्चों, किसानों, मजदूरों, नौकरी पेशा लोगों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह रास्ता अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
एम्बुलेंस के लिए भी जानलेवा रास्ता 🚑🚑
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से होकर आने-जाने वाली एम्बुलेंस अक्सर बीच रास्ते में फँस जाती हैं। हाल ही में एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाते समय एम्बुलेंस गड्ढे में फँस गई, जिससे उसे समय पर उपचार नहीं मिल सका। ग्रामीणों का कहना है — “हमारे लिए यह सड़क अब जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी बन चुकी है।”
कोटा क्षेत्र लगातार उपेक्षित
कोटा विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से विकास की उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां के अनेक आदिवासी ग्रामों तक आज भी पहुँचना बेहद कठिन है। बरसात के दिनों में तो कई गांव पूरी तरह कट जाते हैं।
स्थानीय लोग कहते हैं कि “विकास की पहली शर्त सड़क होती है, और कोटा में वही नहीं है।”
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बयान
शंकर लाल सोनी (जनपद सदस्य, क्षेत्र-3) ने कहा,
“मैंने इस सड़क समस्या को लेकर सभी अधिकारियों से बात की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के SDO से चर्चा की, लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पास फंड नहीं है और ऊपर बात करनी होगी। अधिकारी केवल जवाब देने में व्यस्त हैं, समाधान में नहीं।”
दीपक पांडेय (उपसरपंच, करवा) का कहना है,
“हमने इस गंभीर समस्या की जानकारी स्थानीय प्रशासन और SDM को दी है, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीण अब चक्काजाम और विरोध की तैयारी में हैं। प्रशासन अगर जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो जनाक्रोश बढ़ेगा।”
राजू सिंह राजपूत (मंडल अध्यक्ष-भाजपा,बेलगहना) ने कहा,
“पूर्व सरकार के समय सड़क निर्माण में भारी अनियमितताएँ हुई थीं। अब हम DMF फंड से सड़कों के नवनिर्माण की योजना बनाकर इस समस्या को दूर करने का प्रयास करेंगे।”
PMGSY विभाग की सफाई
अनिल बरेठ (सहायक इंजीनियर, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) ने कहा,
“यह सड़क छह वर्ष पुरानी है, जिसकी मेंटेनेंस अवधि समाप्त हो चुकी है। हमारे पास एजेंसी नहीं है और न ही अलग से फंड्स उपलब्ध हैं। हमने प्रस्ताव रायपुर भेजा है और शासन से मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फिलहाल तात्कालिक सुधार संभव नहीं है।”
फील्ड विजिट नहीं करते अधिकारी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शायद ही कभी फील्ड विजिट करते हों। निरीक्षण के अभाव में सड़कों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
कोटा से बेलगहना और बेलगहना से खोंगसरा मार्गों की स्थिति भी इसी तरह की है, जहाँ गहरे गड्ढे अब दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।


स्थानीय नेताओं पर सवाल??
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय विधायक और सांसद भी अब इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बिलासपुर के सांसद जी अब केंद्रीय शहरी मंत्री बन गए है। अब ग्रामीण क्षेत्रो से उनका कोई सरोकार नही। “विकास की बातें तो मंचों से होती हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि हमारे गांव तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है,” आजाद भारत न्यूज़ की टीम ने जब सांसद महोदय को समस्या से अवगत कराने फोन किया तो उनके निजी सहायक ने हर बार की तरह एक ही बात किया- हम भैया को बता देंगे।
🚗🚙 कोटा-बेलगहना होकर खोंगसरा के रास्ते गौरेला-पेंड्रा और मरवाही जाते हैं जनप्रतिनिधि लेकर इस सड़क की समस्या को अनदेखा और नजरअंदाज करते हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और शासन तत्काल हस्तक्षेप करें, सड़क की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करें, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन का अधिकार मिल सके।
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