बिलासपुर DEO नियुक्ति पर हाईकोर्ट की रोक, शिक्षामंत्री के संज्ञान में मामला फिर भी चुप्पी! वरिष्ठ प्राचार्य के रहते कनिष्ठ को DEO का प्रभार देने का विरोध,
आजाद भारत न्यूज़-बिलासपुर छत्तीसगढ़
वरिष्ठ प्राचार्यों की अनदेखी का आरोप, 6 माह पहले प्राचार्य बने अधिकारी को दिया गया था प्रभारी DEO का प्रभार
कोटा, बिलासपुर | 1 सितंबर 2026।
बिलासपुर जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति को लेकर विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। वरिष्ठ प्राचार्यों की मौजूदगी के बावजूद कनिष्ठ प्राचार्य को प्रभारी DEO बनाए जाने के मामले में हाईकोर्ट द्वारा नियुक्ति पर रोक लगाए जाने के बाद भी शिक्षा विभाग की ओर से अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा मामला शिक्षामंत्री के संज्ञान में पहुंच चुका है, तो आखिर इस पर अब तक चुप्पी क्यों है?
प्राचार्य कल्याण संघ बिलासपुर का कहना है कि 10 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा, मस्तूरी के प्राचार्य श्री रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया था। संघ के अनुसार, उस समय उन्हें प्राचार्य पद पर आए लगभग छह माह ही हुए थे।
शिक्षामंत्री समेत शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया था ज्ञापन
इस नियुक्ति का विरोध करते हुए प्राचार्य कल्याण संघ ने महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा था। संघ के पदाधिकारियों ने संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों से व्यक्तिगत मुलाकात कर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
संघ की मांग थी कि बिलासपुर जिले में लंबे समय से प्राचार्य के पद पर कार्यरत वरिष्ठ प्राचार्य को ही प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी दी जाए।
इसके बावजूद जब शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट ने नियुक्ति पर लगाई रोक
प्राचार्य राघवेंद्र गौरहा एवं कामेश्वर बैरागी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में बताया गया कि बिलासपुर जिले में 100 से अधिक ऐसे प्राचार्य हैं जो नियुक्त अधिकारी से 18 वर्ष या उससे अधिक वरिष्ठ हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से शासन के सर्कुलर और वरिष्ठता के नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों के रहते कनिष्ठ को इतने महत्वपूर्ण पद का प्रभार कैसे दिया जा सकता है।

10 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने बिलासपुर DEO की नियुक्ति पर रोक लगा दी। इसके बाद शासन के सामने नए सिरे से निर्णय लेने की स्थिति बन गई है।
फैसले के बाद भी शिक्षा विभाग की चुप्पी पर सवाल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब तक बिलासपुर जिले में नियमित जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है। शिक्षा विभाग में लगातार प्रभारी व्यवस्था जारी रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जब मामला स्वयं शिक्षामंत्री के संज्ञान में है, हाईकोर्ट का आदेश भी सामने आ चुका है और वरिष्ठ प्राचार्यों की ओर से शासन को कई बार अभ्यावेदन दिया जा चुका है, तब विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
प्राचार्य संघ का कहना है कि बिलासपुर जैसे बड़े जिले की शिक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक प्रभारी व्यवस्था के भरोसे रखना उचित नहीं है।
अब नए प्रभारी DEO को लेकर फिर चर्चा
इधर सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि करतला विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री संदीप पांडे का नाम बिलासपुर के प्रभारी DEO के लिए संभावित सूची में शामिल किया गया है। हालांकि, इस संबंध में शासन का कोई आधिकारिक आदेश अभी सामने नहीं आया है।
यदि हाईकोर्ट के आदेश और वरिष्ठता के मुद्दे के बीच किसी कनिष्ठ अधिकारी को दोबारा प्रभारी DEO बनाया जाता है, तो शिक्षा विभाग में विवाद और बढ़ सकता है।
संघ की दो टूक—वरिष्ठता का पालन हो
प्राचार्य कल्याण संघ ने शासन से मांग की है कि बिलासपुर जिले में कार्यरत प्राचार्यों की वरिष्ठता सूची के आधार पर वरिष्ठतम पात्र प्राचार्य को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया जाए।
संघ का कहना है कि इससे न केवल हाईकोर्ट के आदेश की भावना का सम्मान होगा, बल्कि विभाग में पारदर्शिता, वरिष्ठता और प्रशासनिक मर्यादा भी कायम रहेगी।
अब देखना यह होगा कि शिक्षामंत्री के संज्ञान में मामला होने और हाईकोर्ट की रोक के बाद शासन कब तक निर्णय लेता है और बिलासपुर जिले को नियमित DEO मिलता है या फिर एक बार फिर प्रभारी व्यवस्था के जरिए ही शिक्षा विभाग चलाया जाता है।
आजाद भारत न्यूज़
कोटा, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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