कुत्ते के काटने पर घायल ग्रामीण को लेकर पहुंचे अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केंदा में लटका मिला ताला!
घायल को समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप, कांग्रेस नेता ईश्वर तंवर और साहिल प्रजापति ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल; जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग।
घायल को समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप, कांग्रेस नेता ईश्वर तंवर और साहिल प्रजापति ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल; जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग।
केंदा/कोटा, बिलासपुर।आजाद भारत न्यूज़-प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट-
बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केंदा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुत्ते के काटने से घायल ग्रामीण को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटका मिला। समय पर उपचार नहीं मिलने से परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई।

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम केंदा मानिकपुर निवासी सोबिन्द सिंह टेकाम, पिता शिवलाल, को कुत्ते ने काट लिया था। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण उन्हें उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केंदा लेकर पहुंचे। इस दौरान कांग्रेस नेता ईश्वर तंवर और साहिल प्रजापति भी ग्रामीणों के साथ अस्पताल पहुंचे। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल बंद था और मौके पर डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद नहीं थे।
अस्पताल में ताला, तो मरीजों को इलाज कहां मिलेगा?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों का क्या औचित्य है? अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्देश्य आसपास के गांवों के लोगों को स्थानीय स्तर पर उपचार उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि जरूरत के समय अस्पताल ही बंद मिले, तो मरीजों को कोटा या बिलासपुर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कुत्ते के काटने पर तत्काल उपचार जरूरी
कुत्ते के काटने की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ऐसे मामलों में घाव की तत्काल सफाई, चिकित्सकीय जांच और रेबीज से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केंदा में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध थी या नहीं और घायल को उपचार की सुविधा क्यों नहीं मिल सकी?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
इस मामले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) कोटा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बिलासपुर की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि घटना के समय अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच की जाए। ड्यूटी रजिस्टर, उपस्थिति रिकॉर्ड और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही या अनधिकृत अनुपस्थिति सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।


अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों के संचालन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं और स्वास्थ्य कर्मचारियों को नियमित वेतन दिया जाता है। इसके बावजूद यदि जरूरत के समय मरीजों को उपचार नहीं मिलता, तो यह व्यवस्था के प्रति आम जनता के भरोसे को प्रभावित करता है।
अब सवाल यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केंदा में कथित अव्यवस्था की जांच कब होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा या ग्रामीणों की शिकायत केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी?
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमित चिकित्सा सेवाएं और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
आजाद भारत न्यूज़
प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट
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