नहर टूटी, किसान परेशान! सिंचाई विभाग के अधिकारी-कर्मचारी कहां हैं? कई शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
सोनसाय नवागांव में सुखनैया नाला के पास टूटी नहर, फसल को पानी की जरूरत के बीच किसानों की बढ़ी चिंता।
आजाद भारत न्यूज़ विशेष रिपोर्ट- प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट:-
खोंगसरा/कोटा/बिलासपुर – किसानों को जिस समय अपनी फसलों के लिए सिंचाई के पानी की सबसे अधिक जरूरत है, उसी समय सोनसाय नवागांव के सुखनैया नाला के पास नहर टूट जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि नहर में लंबे समय से रिसाव हो रहा था। इसकी शिकायत कई बार संबंधित विभाग से की गई, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं होने के कारण अब नहर टूट गई है।
यह नहर सिंचाई विभाग के खोंगसरा उपसंभाग के अंतर्गत आती है। किसानों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और समय पर मरम्मत नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति बनी है। अब फसलों को पानी की जरूरत है, लेकिन नहर क्षतिग्रस्त होने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसानों के सामने खुद पानी की व्यवस्था करने की मजबूरी खड़ी हो गई है।

एसडीओ का जवाब – डेढ़ से दो माह लगेंगे
इस संबंध में सिंचाई विभाग के एसडीओ श्री टंडन से दूरभाष पर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि संबंधित नहर की मरम्मत का प्राक्कलन (स्टीमेट) तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। मरम्मत की प्रक्रिया में लगभग डेढ़ से दो माह का समय लग सकता है। इससे पहले कुछ नहीं किया जा सकता।
वहीं, जब उनसे किसानों से मिलने और मौके का निरीक्षण करने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब वे क्षेत्र के दौरे पर आएंगे, तब इसकी जानकारी दी जाएगी।
लेकिन सवाल यह है कि जब किसान अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों से मिलना चाहते हैं, तो खोंगसरा सिंचाई विभाग कार्यालय में अधिकारी कब उपलब्ध रहेंगे? किसान आखिर अपनी समस्या किसके सामने रखें?
सीएम हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत, फिर भी समस्या बरकरार
किसानों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि क्षेत्र में नहर टूटने, पानी की समस्या और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के फील्ड में उपलब्ध नहीं रहने को लेकर कई बार शिकायतें की गई हैं। इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि?
बेलगहना भाजपा मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत ने कहा कि क्षेत्र में जगह-जगह नहरें टूटी हुई हैं। सिंचाई विभाग की उदासीनता स्पष्ट दिखाई दे रही है। फील्ड में अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते, जिससे किसानों को अपनी समस्याएं बताने में परेशानी होती है। इस पूरे मामले की शिकायत कृषि मंत्री से भी की गई है।
अब जिम्मेदारों से सवाल
- नहर में लंबे समय से हो रहे रिसाव के बावजूद मरम्मत क्यों नहीं की गई?
- किसानों की बार-बार शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- मरम्मत में डेढ़ से दो माह लगेंगे, तब तक किसान सिंचाई के लिए क्या करें?
- खोंगसरा सिंचाई विभाग कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारी कब उपलब्ध रहेंगे?
- क्या विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर किसानों की समस्या का समाधान करेंगे?
किसानों की फसल सिंचाई के इंतजार में है। ऐसे में केवल स्टीमेट तैयार कर उच्च कार्यालय भेज देना पर्याप्त नहीं है। जरूरत है कि विभाग तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करे और क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाए।
आजाद भारत न्यूज किसानों की इस समस्या को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने और समाधान होने तक इस मुद्दे को उठाता रहेगा।


![]()