तुलुफ गांव के पास बाघ ने किया गाय का शिकार, वन विभाग ने पैरों के निशान मिलने की पुष्टि की
बाघ की मौजूदगी से क्षेत्र में दहशत, वन विकास निगम के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल??
आजाद भारत न्यूज़ से विशेष रिपोर्ट:-
खोंगसरा-(तुलुफ)-कोटा/बिलासपुर–
वन विकास निगम लिमिटेड के वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संकेत मिलने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। तुलुफ ग्राम के नजदीक वन विकास निगम लिमिटेड के क्षेत्र क्रमांक 795/96 की सीमा के पास एक छोटी गाय का शिकार किए जाने का मामला सामने आया है। घटना स्थल पर मिले पैरों के निशानों के आधार पर वन विभाग की टीम ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वनरक्षक कुंजबिहारी पोर्ते, टीकाराम जायसवाल सहित वन विकास निगम के चौकीदार रघु एवं अन्य कर्मचारियों ने घटनास्थल का प्रारंभिक निरीक्षण कर जांच की। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पैरों के निशानों की जानकारी विभागीय स्तर पर साझा की गई है।

वन विकास निगम के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल
इस घटना के बाद वन विकास निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि घटना के बाद भी निगम के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। इससे पहले वन्यजीव भालू की मौत के मामले में भी अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर शिकायत की गई थी। इस संबंध में वन विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा एवं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी हर जगह निगम के टीम से पहले पहुंचते हैं।

पहले अफवाह, अब पैरों के निशान मिलने से बढ़ी चिंता
क्षेत्र में बाघ की दस्तक को लेकर पहले भी मीडिया और सोशल मीडिया पर खबरें एवं चर्चाएं सामने आ रही थीं। हालांकि, अब वन विभाग की टीम को मौके पर बाघ के पैरों के निशान मिलने के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लोगों में वन्यजीव की मौजूदगी को लेकर भय का माहौल है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से की सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल में अकेले नहीं जाने तथा वन्यजीव से संबंधित किसी भी प्रकार की गतिविधि या पदचिह्न दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है। ग्रामीणों से सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से जंगल की ओर जाने से बचने को कहा गया है।



अब सवाल यह है कि वन विकास निगम के अधिकारी वन क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर कितने सक्रिय हैं? घटना के बाद अधिकारियों की मौके पर अनुपस्थिति का कारण क्या है? इन सवालों पर विभागीय जवाब का इंतजार है।
आजाद भारत न्यूज | जनहित में जारी
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