November 30, 2025

कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव की मांग तेज—वन भूमि पर पीढ़ियों से बसे आदिवासी परिवारों को मिले वन अधिकार पट्टा, वैधानिक अधिकार से अब भी वंचित

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आजाद भारत न्यूज़ | प्रदीप कुमार की रिपोर्ट बिलासपुर, 21 नवंबर 2025

कोटा क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में विधायक अटल श्रीवास्तव ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्टर बिलासपुर को विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने वन भूमि पर लंबे समय से निवासरत व खेती कर रहे आदिवासी परिवारों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार पट्टा प्रदान करने की तत्काल मांग की है।

कोटा क्षेत्र—वनांचल, परंपरा और संघर्ष का मेल

कोटा क्षेत्र पूरी तरह से वनांचल और आदिवासी बहुल इलाका है। यहां बैगा, धनुहार, सौता, गोंड़, बिंझवार जैसे परंपरागत आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से बसे हुए हैं। ये समुदाय सदियों से वन भूमि पर रहकर कोदो, कुटकी, धान, माईसूरा सहित कई पारंपरिक फसलों की खेती कर अपनी आजीविका चलाते आ रहे हैं।

लेकिन इनके वर्षों के कब्जे और परंपरागत अधिकारों के बावजूद आज भी इन परिवारों को उनका वैधानिक वन अधिकार पट्टा उपलब्ध नहीं हो पाया है। यह स्थिति आदिवासी समुदायों के लिए लगातार चिंता और असुरक्षा का कारण बनी हुई है।

भूमि अधिकार न मिलने से असुरक्षा और योजनाओं से वंचित

विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि भूमि का कानूनी अधिकार न होने से इन परिवारों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। उन्हें यह भय सताता रहता है कि किसी भी दिन उन्हें अपनी भूमि और मकान से बेदखल किया जा सकता है।

साथ ही, वन अधिकार पट्टा न होने की वजह से ये परिवार —शासकीय योजनाओं,बैंक ऋण सुविधाओं,कृषि विकास कार्यक्रमों,आवास योजनाओं,सामाजिक सुरक्षा योजनाओं

के लाभ से वंचित रह जाते हैं। ये सभी योजनाएँ वैधानिक दस्तावेजों की मांग करती हैं, जिनकी अनुपस्थिति में आदिवासी परिवार मूलभूत सुविधाओं तक भी पहुंच नहीं पाते।

स्थायी आजीविका और सम्मानजनक जीवन का प्रश्न

अटल श्रीवास्तव ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि आदिवासी समुदायों को स्थायी आजीविका, सुरक्षित निवास, और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना सरकार का दायित्व है। वन अधिकार पट्टा मिलने से न केवल उनकी जमीन पर सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि वे अपने खेतों में आधुनिक कृषि योजनाओं का लाभ लेकर उत्पादन बढ़ा सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इन परिवारों को उनका व्यक्तिगत या सामुदायिक वन अधिकार पट्टा नहीं मिलता, तब तक उन्हें वास्तविक सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ना कठिन होगा।

जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

विधायक ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि सभी पात्र और वंचित आदिवासी परिवारों की सूची बनाकर उन्हें वन अधिकार पट्टा शीघ्र वितरित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल कागज का दस्तावेज नहीं, बल्कि इन परिवारों के भविष्य, सुरक्षा, पहचान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।

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