November 30, 2025
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बिलासपुर, 1 नवम्बर 2025। आजाद भारत न्यूज़
रायपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ के नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण और भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के आयोजन में पूरे प्रदेश से जनपद पंचायतों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत कोटा क्षेत्र के कई प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय निजी सैर-सपाटे को तरजीह दी।

कार्यक्रम में शामिल होने का बहाना, लेकिन निकल पड़े घूमने

सूत्रों के अनुसार, इन प्रतिनिधियों ने रतनपुर में जनपद अधिकारियों के पास अपनी गाड़ियों के नंबर दर्ज करवा दिए, ताकि यह दर्शाया जा सके कि वे रायपुर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में जा रहे हैं। लेकिन हकीकत में उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की जगह घूमने की योजना बना ली।
ग्राम पंचायत रिगवार, मझवानी, दारसागर और कंचनपुर के प्रतिनिधि कोरबा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मड़वारानी घूमने निकल पड़े, जबकि ग्राम पंचायत उमरिया दादर के प्रतिनिधि रायपुर के जंगल सफारी में सैर का आनंद लेते देखे गए।

वापसी के दौरान हादसा, बाल-बाल बचे प्रतिनिधि

जानकारी के मुताबिक, मड़वारानी से लौटते समय ग्राम पंचायत रिगवार के प्रतिनिधियों की कार तेज रफ्तार में अनियंत्रित हो गई। पहले गाड़ी सड़क किनारे पेड़ से टकराई, फिर खाई में लुढ़ककर नीचे दूसरे पेड़ में जाकर फंस गई।
हालांकि हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन सभी को मामूली चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर वाहन कुछ और आगे बढ़ता तो बड़ा हादसा टलना मुश्किल था।

जनपद क्षेत्र में चर्चा और सवाल

यह पूरा मामला अब जनपद पंचायत कोटा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री स्तर के सरकारी कार्यक्रम में जाने का नाम लेकर सरकारी वाहनों और संसाधनों का निजी उपयोग किया गया, जो सीधा सरकारी धन और जिम्मेदारी का दुरुपयोग है।

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब चुने हुए प्रतिनिधि ही अपने कर्तव्यों की अवहेलना करेंगे, तो आम नागरिकों से जवाबदेही की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए, ताकि जनपद स्तर पर चल रही शासकीय योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

प्रशासन मौन, कार्रवाई की मांग

घटना की जानकारी मिलने के बाद भी जनपद पंचायत प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान या जांच आदेश जारी नहीं किया गया है।
स्थानीय लोगों और पंचायत कर्मियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जनप्रतिनिधि जनहित के कार्यों को गंभीरता से लें और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो।

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