अज्ञात वाहन की टक्कर से दंपति गंभीर रूप से घायल, प्राथमिक चिकित्सा से इंकार पर ग्रामीणों में नाराजगी- अधिकारियों से की शिकायत
स्थान – खोंगसरा, कोटा, बिलासपुर
आज सोमवार शाम तखतपुर से खोंगसरा लौटते समय डोड़की गांव निवासी लक्ष्मण खुसरो और उनकी पत्नी संतोषी खुसरो सड़क हादसे का शिकार हो गए। यह हादसा तुलुफ अंडरब्रिज के पास हुआ, जहां किसी अज्ञात बाइक या वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी।
घटना में दोनों घायल हो गए, जिनमें पति लक्ष्मण खुसरो को गंभीर चोटें आई हैं। राहगीरों ने तुरंत उन्हें सड़क से उठाया और आमागोहन में प्राथमिक उपचार के लिए लाया, लेकिन यहां स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही देखने को मिली। स्थानीय पत्रकार प्रदीप पांडेय ने सूचना मिलते ही स्टाफ और नर्स को काल किया और जानकारी दी। जहां जवाब था-


“ड्यूटी खत्म हो गई” कहकर इलाज से इंकार!
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने आमागोहन स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्टाफ नर्स मंजुला गुप्ता को फोन कर घटना की जानकारी दी और तुरंत मदद मांगी।
लेकिन उनका जवाब था —
“मैंने दिनभर ड्यूटी की है, इमरजेंसी में नहीं देख सकती।” आप मरीज को दूसरे अस्पताल ले।जाएं। टेंगनमाड़ा में स्टाफ होंगे।
घायल को बिना देखे लौटाने की इस घटना से ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। उन्होंने कहा कि “अगर आपातकाल में भी मरीज को नहीं देखा जाएगा, तो ऐसे केंद्र का क्या मतलब?”
डॉक्टर और स्टाफ की मौजूदगी पर गंभीर सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में कोई डॉक्टर या अन्य स्वास्थ्य स्टाफ मौजूद नहीं था।
रात के समय आपातकालीन स्थिति में न तो फोन रिसीव हुआ, न कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि “आमागोहन जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के बाद ताले लग जाते हैं, और स्टाफ अपने घर चला जाता है।”
इस तरह की स्थिति में किसी भी दुर्घटना या आपातकाल में ग्रामीणों की जान खतरे में पड़ जाती है।
ग्रामीणों ने जताया आक्रोश, उच्च अधिकारियों को दी सूचना
आक्रोशित ग्रामीणों ने घटना की जानकारी जनपद प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब आमागोहन में इलाज के लिए पहुंचे लोगों को लौटाया गया हो।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कई बार शिकायत की थी कि केंद्र में ड्यूटी के बाद कोई स्टाफ मौजूद नहीं रहता, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों की मांगें
1. घटना की तत्काल जांच हो और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
2. आमागोहन में 24 घंटे चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जाए।
3. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रात्रिकालीन ड्यूटी स्टाफ की अनिवार्य उपस्थिति हो।
ग्रामीण बोले — “जब अस्पताल में ताले लगते हैं, तो हादसों में इंसान मरते हैं”
जनपद सदस्य प्रतिनिधि बलराम मरावी नें कहा,-
“हमारे गांवों में अस्पताल हैं, लेकिन रात में दरवाजे बंद रहते हैं। अगर हादसे में कोई घायल हो जाए तो वह मरने के लिए मजबूर है। यह डॉक्टरों की कमी नहीं, सिस्टम की संवेदनहीनता है।” इससे पहले भी स्टाफ नर्स समय पर मरीजो को मदद नही दे पाते जिसकी जानकारी मिली थी।
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