खोंगसरा में रेल टावर से बच्चों का मैदान छीना गया, RTI एक्टिविस्ट सुकुमार यादव ने दिया आवेदन
खोंगसरा, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़): आजाद भारत न्यूज़ लाइव की रिपोर्ट-
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर मंडल के अंतर्गत खोंगसरा स्टेशन के पास बच्चों का एकमात्र खेल मैदान अब रेलवे के ‘सुरक्षा कवच (KAVACH)’ टावर निर्माण की भेंट चढ़ गया है। लगभग 10 फीट गहराई तक खुदाई कर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जिससे बच्चों का खेलने का स्थान पूरी तरह नष्ट हो गया है।
यह मैदान वर्षों से बच्चों और युवाओं के खेल, व्यायाम और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। अब वहां मिट्टी, मशीनें और निर्माण सामग्री के ढेर लग गए हैं। इससे स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और बच्चों में नाराजगी व्याप्त है।



सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा —
“यह केवल मैदान का नहीं, बल्कि बचपन का सवाल है। खेल का अधिकार हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। रेलवे इस टावर को किसी वैकल्पिक स्थान पर शिफ्ट करे ताकि बच्चों को उनका मैदान लौटाया जा सके।”
इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए प्रदीप शर्मा ने रेल मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और DRM बिलासपुर को औपचारिक पत्र भेजा है। उन्होंने इसे बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 का उल्लंघन बताया और निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने इस विषय को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी उठाया है। रेल मंत्री, DRM बिलासपुर, NCPCR और PMO India को टैग करते हुए उन्होंने लिखा —
“खोंगसरा का बच्चों का खेल मैदान अब रेल सुरक्षा कवच टावर में बदल गया। बच्चों का खेलना उनका अधिकार है, सुविधा नहीं। रेल मंत्री जी से निवेदन है कि टावर को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।”
RTI एक्टिविस्ट एवं कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य सुकुमार यादव ने दिया आवेदन, बच्चों के मैदान की मांग की बहाली
इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ई) के राज्य सचिव एवं सूचना का अधिकार विभाग प्रमुख सुकुमार यादव ने भी बच्चों के पक्ष में आवाज उठाई है।
उन्होंने बिलासपुर रेलवे मंडल के महाप्रबंधक को आवेदन भेजते हुए कहा —
“खोंगसरा स्टेशन के पास बच्चों का खेल मैदान वर्षों से खेल, व्यायाम और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। रेलवे द्वारा यहां टावर निर्माण कराना बच्चों के खेल अधिकार का उल्लंघन है। इस टावर को वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।”
उन्होंने कहा कि बच्चों के हित, जनभावना और बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 को ध्यान में रखते हुए रेलवे को तत्काल निर्माण कार्य रोकना चाहिए।
राजू सिंह राजपूत (मंडल अध्यक्ष, बेलगहना) ने भी कहा —
> “यह खेल मैदान केवल खेलने का स्थान नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान है। रेलवे को टावर निर्माण रोककर इसे दूसरी जगह शिफ्ट करना चाहिए।”
ग्रामीणों ने भी रेलवे प्रशासन से अपील की है कि बच्चों का खेल मैदान पुनः बहाल किया जाए ताकि वे सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में खेल सकें।

प्रदीप शर्मा ने कहा —
“यह सिर्फ खोंगसरा का मामला नहीं, बल्कि हर गांव के बच्चों के अधिकार की लड़ाई है। हर गांव में बच्चों के खेलने का स्थान होना चाहिए ताकि वे स्वस्थ और खुशहाल बचपन जी सकें।”
रिपोर्ट — आजाद भारत न्यूज़
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