ऑफिस के बाद बॉस का फोन न उठाने का हक: लोकसभा में पेश हुआ ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ बिल
आजाद भारत न्यूज़- 7 दिसंबर 2025
नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए गए। इनमें सबसे अधिक चर्चा में रहा एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले का ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025’, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को ऑफिस समय के बाद काम से जुड़े कॉल, ईमेल या मैसेज का जवाब देने की बाध्यता से मुक्त करना है।

कर्मचारियों को काम और निजी जीवन में संतुलन का अधिकार
सुप्रिया सुले ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य कर्मचारियों को
बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ,
स्वस्थ वर्क-लाइफ बैलेंस,
और लगातार बढ़ रहे डिजिटल बर्नआउट से राहत दिलाना है।
बिल में प्रावधान है कि—
किसी भी संस्था द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनी पर कुल वार्षिक पारिश्रमिक का 1% जुर्माना लगाया जा सकेगा।
सभी कर्मचारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस अथॉरिटी बनाने का सुझाव भी शामिल है।
70 घंटे काम वाली बहस के बीच अहम कदम
देश में 70 घंटे काम के मॉडल पर चल रही बहस के बीच यह बिल कर्मचारियों को निजी समय और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा देने वाला कदम माना जा रहा है।
मासिक धर्म से जुड़े दो बड़े बिल भी पेश
1. मेनस्ट्रुअल बेनिफिट्स बिल, 2024
कांग्रेस सांसद कडियम काव्या ने यह बिल पेश किया। बिल में महिलाओं को माहवारी के दौरान—
आवश्यक सुविधाएं
स्वास्थ्य संबंधी सहायता
कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल
प्रदान करने का प्रावधान है।
2. पेड पीरियड लीव बिल
लोजपा सांसद शंभवी चौधरी ने एक अलग बिल पेश किया, जिसमें:
कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए पेड पीरियड लीव,
स्वच्छता सुविधाएं,
स्वास्थ्य लाभ
सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है।
अन्य प्रमुख बिल
तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने बिल पेश किया, जिसमें तमिलनाडु को मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET से छूट देने का प्रस्ताव है। राज्य पहले ही इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट जा चुका है।
भारत में मृत्युदंड समाप्त करने का प्रस्ताव
डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने देश में मृत्युदंड खत्म करने का बिल पेश किया।
हालाँकि केंद्र का रुख यही रहा है कि कुछ गंभीर मामलों में यह दंड आवश्यक निवारक के रूप में काम करता है।
लोकसभा में पेश हुए ये बिल—कामकाजी लोगों के अधिकार, महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों और बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर चल रही बहसों को नई दिशा दे सकते हैं।
अब इन बिलों पर आगे की प्रक्रिया के लिए संसद की समितियों में विस्तार से चर्चा होगी।

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