रेलवे की लापरवाही से पूरा गांव हलकान- ठेकेदार की खुदाई से 1970 की केबल क्षतिग्रस्त, 3 दिनों से गांव अंधेरे में, पानी के लिए तरस रहे लोग”
रेलवे की लापरवाही उजागर, ठेकेदार की खुदाई से 1970 की केबल क्षतिग्रस्त
पूरा गांव 3 दिन से अंधेरे में, पानी के लिए तरस रहे लोग बिजली विभाग रात-दिन जुटा, रेलवे जिम्मेदारी से पीछे
खोंगसरा (जिला बिलासपुर) आजाद भारत न्यूज़-
रेलवे प्रशासन और उसके ठेकेदारों की गंभीर लापरवाही ने खोंगसरा क्षेत्र के पूरे गांव को पिछले तीन दिनों से अंधेरे और पानी की भारी किल्लत में झोंक दिया है। रेलवे से जुड़े निर्माण कार्य के दौरान मनमाने ढंग से की गई खुदाई में वर्ष 1970 में स्थापित मुख्य विद्युत केबल को क्षति पहुंचाई गई, जिससे लोकल बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई।

इस घटना के बाद गांव में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिजली गुल होने से नल-जल योजना बंद, मोटर पंप नहीं चल पा रहे, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सोशल मीडिया से लेकर मंत्रालय तक शिकायत
इस गंभीर समस्या को लेकर रेल मंत्रालय, माननीय रेल मंत्री और DRM बिलासपुर को ट्विटर (X) के माध्यम से शिकायत भी की गई है। बावजूद इसके अब तक रेलवे प्रशासन की ओर से न तो स्पष्ट जवाब आया है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।


बिजली विभाग का अमला दिन-रात तैनात
घटना के बाद बिजली विभाग का पूरा अमला दिन-रात मौके पर डटा हुआ है। अधिकारी और कर्मचारी समस्या के समाधान में जुटे हैं, लेकिन हालात इसलिए और गंभीर हो गए हैं क्योंकि क्षतिग्रस्त केबल करीब 50 वर्ष पुरानी (1970 की) है, जिसके पार्ट्स अब आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसके साथ ही, विशेष तकनीकी विशेषज्ञता वाले इंजीनियरों का भी अभाव सामने आ रहा है, जिससे मरम्मत कार्य में देरी हो रही है।
बिजली विभाग का कहना है कि नुकसान रेलवे के कार्य के कारण हुआ है, इसके बावजूद विभाग पूरी जिम्मेदारी निभाते हुए समाधान में जुटा है।
ठेकेदारों की मनमानी पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे के ठेकेदार बिना सर्वे, बिना सूचना और बिना विभागीय समन्वय के जहां-तहां खुदाई कर देते हैं, जिससे पहले भी कई बार ऐसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। इस बार नुकसान ज्यादा बड़ा होने के कारण पूरा गांव इसकी कीमत चुका रहा है।
रेलवे की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि जिस विभाग की लापरवाही से यह संकट पैदा हुआ, वही विभाग अब जिम्मेदारी लेने से पीछे हटता नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि रेलवे समय रहते हस्तक्षेप करता, तकनीकी सहयोग देता और वैकल्पिक व्यवस्था करता, तो हालात इतने नहीं बिगड़ते।
पढ़ाई, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर असर
बिजली नहीं होने से
छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है,
मोबाइल और संचार सेवाएं ठप हैं,
रात के समय अंधेरे के कारण सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है,
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
1. तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल की जाए,
2. क्षतिग्रस्त केबल के सुधार व पुनर्स्थापन का पूरा खर्च रेलवे वहन करे,
3. दोषी ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
4. भविष्य में खुदाई से पहले बिजली विभाग से अनिवार्य अनुमति और तकनीकी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।
फिलहाल खोंगसरा का पूरा गांव अंधेरे, प्यास और प्रशासनिक उदासीनता के बीच बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
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