June 4, 2026
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कोटा विकासखंड में आंगनबाड़ी भवन निर्माण पर उठे सवाल, बच्चे और हितग्राही हो रहे प्रभावित,कहीं।गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य, कहीं काम ही शुरू नही।

कोटा (बिलासपुर)। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत स्वीकृत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण में कोटा विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों में गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कहीं भवन निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया है, तो कहीं निर्माण स्थल चयन और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन भवनों का निर्माण बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं की सुविधा के लिए होना था, वे या तो विवादों में फंस गए हैं या फिर ऐसे स्थानों पर बनाए जा रहे हैं जहां पहुंचना ही कठिन है।


आमागोहन-1 : दो साल से बंद केंद्र, नया भवन भी विवादों में
ग्राम पंचायत आमागोहन-1 में आंगनबाड़ी भवन पिछले दो वर्षों से जर्जर होने के कारण बंद पड़ा है। नवीन भवन निर्माण के लिए राशि मिलने के बावजूद पुराने भवन को हटाकर उसी स्थान पर निर्माण कराने के बजाय पंचायत ने एक अन्य भूमि का चयन कर लिया, जिसे ग्रामीण निजी और विवादित भूमि बता रहे हैं।

पंचायत आमागोहन जहां बच्चे पढ़ते है।


भूमि विवाद के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। नतीजतन पिछले दो वर्षों से आंगनबाड़ी के बच्चे पंचायत भवन में बैठने को मजबूर हैं। ऐसे में पंचायत भवन में पंचायत का काम हो या बच्चों की पढ़ाई, यह बड़ा सवाल बन गया है।


तुलुफ : बसाहट से 800 मीटर दूर, रेल लाइन के पार बन रहा भवन
ग्राम पंचायत तुलुफ का मामला और भी गंभीर माना जा रहा है। यहां का पुराना आंगनबाड़ी भवन लगभग चार वर्षों से जर्जर था। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल परिसर में पर्याप्त भूमि नहीं होने का हवाला देकर सरपंच और निर्माण एजेंसी ने नया भवन गांव की मुख्य बसाहट से लगभग 800 मीटर दूर, रेल लाइन के पार बनाना शुरू कर दिया।

खराब गुणवत्ता की ईंट जिससे काम शुरू होना है।


ग्रामीणों का कहना है कि इतनी दूरी पर बने भवन तक छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य हितग्राहियों का नियमित पहुंचना मुश्किल होगा। साथ ही रेल लाइन और सड़क पार करने का जोखिम भी बना रहेगा।
निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार ईंटें अत्यंत कमजोर हैं और हाथ से दबाने पर टूट जाती हैं। ऐसे में बच्चों के लिए बनने वाले भवन की मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।


मोहली और बगबूड़ : राशि जारी, लेकिन विवाद में अटका निर्माण
ग्राम पंचायत मोहली में दो आंगनबाड़ी भवनों के लिए राशि प्राप्त हो चुकी है। इनमें एक भवन मोहली और दूसरा आश्रित ग्राम बगबूड़ के लिए स्वीकृत है।
ग्रामीणों के अनुसार बगबूड़ में कम आबादी होने के कारण कुछ लोग भवन को ग्राम लठौरी में बनवाने की मांग कर रहे हैं। इसी विवाद के चलते दोनों भवनों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता और विभागीय निगरानी की कमी के कारण योजनाएं केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही हैं।


टाटीधार गौरखुरी: भवन बना, लेकिन अब तक अधूरा
ग्राम पंचायत टाटीधार के आश्रित ग्राम में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी पुताई, रंगाई और अन्य अंतिम कार्य बाकी हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यहां भी निर्माण में निम्न गुणवत्ता की ईंटों का उपयोग किया गया था। भवन तैयार होने के बाद भी विभाग को अब तक हैंडओवर नहीं किया गया है, जिससे बच्चों और कार्यकर्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।

गौरखुरी का भवन जोअब तक पूर्ण नही।


नई शिक्षा नीति की भावना पर भी प्रश्न
नई शिक्षा नीति और बालवाड़ी कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूल परिसरों के समीप विकसित करने पर जोर दिया गया है, ताकि प्रारंभिक बाल शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा के बीच सहज समन्वय स्थापित हो सके।
लेकिन कोटा विकासखंड के कई मामलों में भवन या तो वर्षों से अधूरे हैं, या फिर बसाहट से दूर बनाए जा रहे हैं। इससे नीति के उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।


क्या कहते हैं जिम्मेदार?
सुरुचि श्याम, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा—
“यह सही है कि कई आंगनबाड़ी भवन समय पर पूरे नहीं हो पाए हैं। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत है। इस संबंध में जनपद पंचायत कोटा के सीईओ को शिकायत की जाएगी। साथ ही गुणवत्ताहीन भवनों का निरीक्षण कराएंगे और मानक पूरे होने के बाद ही उन्हें हैंडओवर लिया जाएगा।”


ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं की राय
प्रदीप पासवान, ग्रामीण तुलुफ का कहना है—
“आंगनबाड़ी भवन गांव की बसाहट के पास होना चाहिए। भवन दूर होने से छोटे बच्चे नियमित नहीं पहुंच पाएंगे। रेल लाइन और सड़क का खतरा भी बना रहेगा।”


एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया—
“बिना केंद्र के बच्चों के साथ काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। कभी पंचायत भवन तो कभी समुदाय के भवन में संचालन करना पड़ता है। जल्द से जल्द भवन निर्माण पूरा होना चाहिए।”


प्रदीप शर्मा, सामाजिक एवं शिक्षा कार्यकर्ता ने कहा—
“आंगनबाड़ी भवन जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। यहीं से बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत होती है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”


बड़े सवाल
राशि मिलने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो पा रहा?
बसाहट से दूर आंगनबाड़ी भवन बनाने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है?
निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग क्यों नहीं हो रही?
नई शिक्षा नीति के प्रावधानों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा?


कोटा विकासखंड के इन मामलों ने आंगनबाड़ी भवन निर्माण की निगरानी, गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और बच्चों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आंगनबाड़ी केंद्र कब तक उपलब्ध हो पाते हैं।
— आजाद भारत न्यूज़

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