सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाया मुद्दा, CM हेल्पलाइन और कलेक्टर को WhatsApp से पहुंची जानकारी; त्वरित संज्ञान लेते ही दिव्यांग का आवास स्वीकृत
जर्जर मकान में रहने को मजबूर था दिव्यांग-मूकबधिर, सोशल मीडिया और CM हेल्पलाइन के जरिए पहुंची आवाज; आवास प्लस 2.0 में दर्ज हुआ नाम।
जर्जर मकान में रहने को मजबूर था दिव्यांग-मूकबधिर, कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लिया।
आजाद भारत न्यूज़ से प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट-
बिलासपुर। ग्राम आमागोहन निवासी दिव्यांग एवं मूकबधिर अमीरुद्दीन पिता कबीरुद्दीन के जर्जर मकान की समस्या अब समाधान की ओर बढ़ गई है। बरसात के दौरान घर की दीवारें कमजोर होकर गिरने की कगार पर पहुंच गई थीं। संभावित हादसे को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने भी परिवार को सुरक्षित कमरे में शिफ्ट होने की सलाह दी थी।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार द्वारा CM हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई। साथ ही जिला कलेक्टर महोदय को WhatsApp के माध्यम से घर की स्थिति की फोटो एवं पूरी जानकारी भेजकर तत्काल सहायता की मांग की गई।


जानकारी मिलते ही कलेक्टर ने लिया त्वरित संज्ञान
बताया गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जानकारी मिलते ही त्वरित संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जनपद स्तर पर मामले की जांच एवं पात्रता संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
कलेक्टर की अनुशंसा के बाद अमीरुद्दीन का नाम आवास प्लस 2.0 में दर्ज किया गया और आवास स्वीकृत हुआ। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से जर्जर मकान में रहने को मजबूर दिव्यांग परिवार को बड़ी राहत मिली है।


भाई ने सोशल मीडिया पर भी उठाई थी आवाज
अमीरुद्दीन के छोटे भाई रंमजु पिता कबीरुद्दीन ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो साझा कर स्थानीय सरपंच, जनपद सदस्य एवं जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई थी।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में घर की जर्जर स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही थी। पुरानी दीवारें और खपरैल की छत बरसात में परिवार के लिए खतरा बनी हुई थी।
समुदाय, सोशल मीडिया और प्रशासन के बीच बनी कड़ी
इस पूरे मामले में एक बार फिर सामने आया कि यदि किसी जरूरतमंद की समस्या को सही माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाया जाए तो उसका त्वरित समाधान संभव है।
सोशल मीडिया के माध्यम से मामला सामने आया, CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज हुई और कलेक्टर को WhatsApp के जरिए मौके की तस्वीरों एवं स्थिति की जानकारी दी गई। मामले का त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की और अब दिव्यांग अमीरुद्दीन के लिए आवास स्वीकृत हो चुका है।
यह कार्रवाई उन जरूरतमंद परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं और शासकीय आवास योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं।
आजाद भारत न्यूज़
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