रेल जन संवाद अभियान पर उठे सवाल: खोंगसरा, टेंगनमाड़ा और बेलगहना में प्रचार-प्रसार का अभाव, पत्रकारों की पहल पर पहुंचे जनप्रतिनिधि
आजाद भारत न्यूज़ से विशेष रिपोर्ट:
बेलगहना-कोटा, बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के विशेष अभियान रेल जन संवाद को लेकर खोंगसरा, टेंगनमाड़ा और बेलगहना रेलवे स्टेशनों पर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे हैं। यात्रियों की समस्याएं सुनने और रेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस अभियान की जानकारी स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों तक समय पर नहीं पहुंचने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं मिल पाई। पत्रकारों द्वारा कार्यक्रम की जानकारी दिए जाने के बाद जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आनन-फानन में रेलवे स्टेशनों पर पहुंचकर अपनी समस्याएं, सुझाव और मांगें रखीं।
बेलगहना में निर्धारित अधिकारी की अनुपस्थिति को लेकर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई। अंततः स्टेशन मास्टर एस.के. गोपे को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की प्रमुख रेल समस्याओं के निराकरण की मांग की गई। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि जब रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की समस्याएं सुनने के लिए विशेष अभियान चलाया है, तो इसकी जानकारी आम जनता तक पहुंचाने और निर्धारित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी गंभीरता से निभाई जानी चाहिए।
बेलगहना में अधिकारी की अनुपस्थिति पर नाराजगी, स्टेशन मास्टर को सौंपा ज्ञापन
बेलगहना रेलवे स्टेशन पर रेल जन संवाद कार्यक्रम के संबंध में स्थानीय स्तर पर सूचना और प्रचार-प्रसार की कमी को लेकर जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े अभियान के बावजूद ग्रामीणों को समय पर जानकारी नहीं मिलना और निर्धारित अधिकारी का उपस्थित नहीं रहना लापरवाही को दर्शाता है। इस स्थिति पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए स्टेशन मास्टर एस.के. गोपे को ज्ञापन सौंपा।



ज्ञापन में बेलगहना रेलवे स्टेशन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए पांच प्रमुख मांगें रखी गईं।
पहली मांग—अमरकंटक एक्सप्रेस का ठहराव: दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस के अप एवं डाउन दोनों मार्गों में बेलगहना स्टेशन पर ठहराव प्रदान किया जाए, जिससे यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिल सके।
दूसरी मांग—फुट ओवरब्रिज का निर्माण: प्लेटफॉर्म क्रमांक 3 से दूसरी ओर जाने के लिए फुट ओवरब्रिज बनाया जाए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
तीसरी मांग—सड़क निर्माण: रेलवे के एक अंडरब्रिज से दूसरे अंडरब्रिज तक पूर्व से पश्चिम दिशा में दोनों ओर सुगम आवागमन के लिए सड़क का निर्माण कराया जाए।
चौथी मांग—आरक्षण काउंटर: बेलगहना रेलवे स्टेशन पर टिकट आरक्षण काउंटर खोला जाए, ताकि लोगों को आरक्षित टिकट बनवाने के लिए दूरस्थ स्टेशनों पर निर्भर न रहना पड़े।
पांचवीं मांग—बाल उद्यान: रेलवे परिसर में बच्चों के मनोरंजन और खेलकूद के लिए बाल उद्यान विकसित किया जाए।
जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक सर्वेक्षण और तकनीकी परीक्षण कराया जाए तथा जनहित में उचित कार्रवाई की जाए।
इस दौरान जनपद सदस्य नेहा सचिन साहू, विधायक प्रतिनिधि शिवदत्त (सबलू) पांडेय, बेलगहना मंडल अध्यक्ष मनोज वाजपेयी, कपिल जायसवाल, वाजपेयी, सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा, जीशान अंसारी, प्रदीप पांडेय सहित यात्रीगण और अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
टेंगनमाड़ा में ट्रेनों के ठहराव से लेकर फुट ओवरब्रिज तक की मांग
टेंगनमाड़ा रेलवे स्टेशन पर भी रेल जन संवाद अभियान को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं। यहां प्रमुख ट्रेनों के ठहराव, आरक्षण काउंटर की सुविधा, फुट ओवरब्रिज के निर्माण तथा सुबह के समय बिलासपुर जाने के लिए अतिरिक्त रेल सुविधा उपलब्ध कराने जैसी मांगें उठाई गईं।


ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के अनेक लोग शिक्षा, रोजगार, इलाज, व्यापार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बिलासपुर सहित दूसरे शहरों की यात्रा करते हैं। ऐसे में ट्रेनों का सुविधाजनक ठहराव और समयानुकूल रेल सेवा उपलब्ध होना आवश्यक है। यात्रियों ने रेल प्रशासन से इन समस्याओं पर ध्यान देकर सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की।
टेंगनमाड़ा में जनपद सदस्य शंकर लाल सोनी, जिला पंचायत सदस्य निरंजन पैकरा, डोमन साहू, रीतिमाला पासवान, शांति सोंधिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने यात्रियों की समस्याओं को रेलवे प्रशासन तक पहुंचाने और उनके निराकरण की मांग करने पर जोर दिया।
खोंगसरा में भी जनप्रतिनिधियों ने उठाईं रेल सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं
खोंगसरा रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भी रेल जन संवाद कार्यक्रम की जानकारी समय पर नहीं मिलने की शिकायत सामने आई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि अभियान का पहले से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया होता, तो अधिक संख्या में ग्रामीण और यात्री अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रख सकते थे।

कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहर खान, विधायक प्रतिनिधि चितरंजन शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र की रेल सुविधाओं से जुड़ी मांगों को उठाया। जनप्रतिनिधियों ने यात्रियों की परेशानियों को दूर करने और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप रेल सुविधाओं में सुधार करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि खोंगसरा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए रेल आवागमन महत्वपूर्ण है। इसलिए यात्रियों की आवश्यकताओं को समझते हुए रेल प्रशासन को स्थानीय स्तर पर नियमित संवाद और समस्याओं के समाधान की व्यवस्था करनी चाहिए।
क्या बिना पर्याप्त प्रचार-प्रसार के सफल होगा जन संवाद?
रेल जन संवाद भारतीय रेलवे की ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य रेलवे अधिकारियों और यात्रियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। इसके माध्यम से यात्री ट्रेनों की देरी, ठहराव, टिकट व्यवस्था, खानपान, सुरक्षा और अन्य यात्री सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने रख सकते हैं। साथ ही, रेलवे सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।



लेकिन खोंगसरा, टेंगनमाड़ा और बेलगहना में कार्यक्रम को लेकर सामने आई शिकायतों ने अभियान के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जनसंवाद का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब लोगों को इसकी जानकारी पहले से दी जाए, संबंधित अधिकारी निर्धारित स्थान पर मौजूद रहें और प्राप्त शिकायतों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित हो।
बेलगहना में निर्धारित अधिकारी की अनुपस्थिति और स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंपे जाने की स्थिति ने भी व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ाई। जनप्रतिनिधियों का सवाल है कि जब रेलवे यात्रियों की समस्याएं सुनने के लिए विशेष अभियान चला रहा है, तो कार्यक्रम की सूचना और अधिकारियों की उपलब्धता में कमी क्यों रही?
अब मांगों पर कार्रवाई का इंतजार
तीनों क्षेत्रों के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं सामने रखकर रेल सुविधाओं में सुधार की अपेक्षा जताई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है और यात्रियों को राहत देने के लिए किन प्रस्तावों पर कार्रवाई की जाती है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि भविष्य में रेल जन संवाद जैसे कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित हो तथा प्राप्त मांगों और शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी जनता को दी जाए।
ग्रामीणों की अपेक्षा स्पष्ट है—रेल जन संवाद केवल औपचारिक कार्यक्रम बनकर न रह जाए, बल्कि यात्रियों की समस्याओं के समाधान और रेल सुविधाओं के विस्तार का प्रभावी माध्यम बने।


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