मरहीमाता मंदिर हादसा: चार जिंदगियां गईं, परिजन को 4-4 लाख की मदद | मंदिर समिति और प्रशासन दोनों पर उठे सवाल??

मरहीमाता मंदिर दर्शन के दौरान हुए हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। हादसे के बाद जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। वहीं जनप्रतिनिधियों ने अतिरिक्त मदद का भरोसा दिलाया। लेकिन इस त्रासदी के बाद मंदिर समिति और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारियों पर सवाल उठने लगे हैं।

हादसे में मृतक
मितान ध्रुव (5 वर्ष) – भाटापारा
मुस्कान ध्रुव (12 वर्ष) – भाटापारा
गौरव ध्रुव (13 वर्ष) – भाटापारा
बलराम ध्रुव (45 वर्ष) – परसदा, बिलासपुर
घटनास्थल का दौरा और राहत
भाजपा मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत ने पंचायत प्रतिनिधियों के साथ घटना स्थल का दौरा किया और प्रशासन से तत्काल मदद दिलाने की मांग की।


जिला प्रशासन ने आपदा राहत कोष से 4-4 लाख रुपये देने की घोषणा की।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और अन्य नेताओं ने भी अतिरिक्त मदद का आश्वासन दिया।
प्रशासन पर सवाल
मंदिर तक सड़क और पुलिया का निर्माण न होना, नाले पर सुरक्षा उपाय न होना, प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।
हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं, फिर भी इसे पर्यटन क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया और न ही कोई विकास कार्य किए गए।
राहत-बचाव में भी देरी हुई क्योंकि रास्ते जर्जर और दुर्गम हैं।
मंदिर समिति की जिम्मेदारी????
मंदिर समिति को नियमित रूप से दान प्राप्त होता है, लेकिन सुरक्षा और विकास कार्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नाले किनारे चेतावनी बोर्ड, बैरिकेड और मार्ग सुधार करने में समिति ने कभी पहल नहीं की।
हादसे के बाद भी समिति की ओर से न तो परिजनों को मदद दी गई और न ही राहत कार्य में सहयोग।
ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासन और मंदिर समिति की संयुक्त लापरवाही का परिणाम है।
अगर सड़क, पुल और सुरक्षा इंतज़ाम पहले से होते, तो यह त्रासदी टल सकती थी।
समिति और प्रशासन दोनों को मिलकर मंदिर क्षेत्र को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
मरहीमाता मंदिर हादसा चार मासूम जिंदगियां निगल गया। प्रशासन ने आर्थिक मदद देकर जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया, लेकिन सवाल यह है कि क्यों पहले से सुरक्षा इंतज़ाम नहीं किए गए?
मरही माता मंदिर हादसे के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत ने मंदिर समिति और प्रशासन दोनों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि—
“मरही माता मंदिर में लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन करने आते हैं। मंदिर समिति को दान के पैसों का उपयोग सिर्फ धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। इस हादसे में समिति की ओर से तत्काल मदद न मिलना बेहद निराशाजनक है।”
साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि—
“मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा बोर्ड, रेलिंग, मजबूत नाले और सड़क की मरम्मत जैसे विकास कार्य तत्काल किए जाने चाहिए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। प्रशासन और विभाग को मिलकर मरही माता मंदिर क्षेत्र के लिए एक समग्र विकास योजना तैयार करनी चाहिए।”
उन्होंने मंदिर समिति से अपील की कि वे तुरंत आगे आकर पीड़ित परिवारों की मदद करें और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

