“स्मार्ट मीटर नहीं, स्मार्ट शिक्षक चाहिए – वनांचल के बच्चों की पढ़ाई चौपट” समय पर नही पहुंचते शिक्षक, बच्चें खुद खोलते हैं स्कूल।

“शिक्षामंत्री की हिदायत भी बेअसर – समय पर स्कूल नहीं पहुंचते शिक्षक, ई-अटेंडेंस की उठी मांग”
कोटा/बिलासपुर।आजाद भारत न्यूज़ लाइव।
जिले के कोटा विकासखण्ड के वनांचल क्षेत्र में शिक्षकों की लापरवाही लगातार बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। शासकीय प्राथमिक शाला घोबघट (संकुल केंद्र छतौना) में जब मीडिया टीम पहुंची तो चौंकाने वाले हालात सामने आए।

मौके पर हालात
विद्यालय समय पर खोलने के बजाय शिक्षक बेतुके बयान देते नजर आए।
सवाल पूछने पर एक शिक्षक ने कहा कि “विद्यालय तो बच्चे ताला खोलकर चालू करते हैं”।
मीडिया टीम ने जब खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) नरेंद्र मिश्रा से फोन पर बात कराई तो उन्होंने भी शिक्षकों से कहा कि “मीडिया को यह नहीं कहना कि बच्चे ताला खोलते हैं, बल्कि बोलो कि पालक विद्यालय खोलते हैं।”
इस बातचीत की रिकॉर्डिंग समय न्यूज़ के पास सुरक्षित है।

⚠️ बड़ी लापरवाही
शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते, बच्चे कई बार बिना शिक्षक के ही राष्ट्रगान कर कार्यक्रम शुरू करते हैं।
मॉनिटरिंग के अभाव में शिक्षकों की मनमानी बढ़ रही है।
नियमित वेतन लेने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है।
बच्चों का भविष्य खतरे में
लापरवाह शिक्षकों की वजह से वनांचल क्षेत्र के बच्चों का शैक्षणिक विकास प्रभावित हो रहा है।
पढ़ाई में पिछड़ने से भविष्य के रोजगार पर असर पड़ेगा।
बच्चों में यह गलत धारणा भी बन रही है कि देर से आना या अनुपस्थित रहना सामान्य है।
✒️ मांग
स्थानीय लोग और अभिभावक लगातार मांग कर रहे हैं कि –
लापरवाह शिक्षकों पर निलंबन की कार्रवाई हो।
वनांचल क्षेत्र के विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
ई-अटेंडेंस सिस्टम लागू होने से शिक्षकों की उपस्थिति पर सीधा नियंत्रण रहेगा।
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विभागीय कार्यभार संभालने के बाद अपनी पहली बैठक में ही साफ कहा था कि “शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचें, इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
इसके बावजूद बार-बार समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बाद भी शिक्षक हिदायत का पालन नहीं कर रहे।
⚠️ ई-अटेंडेंस की जरूरत
विशेषकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मॉनिटरिंग की भारी कमी है।
ई-अटेंडेंस सिस्टम लागू होने से शिक्षकों की उपस्थिति पर सीधा नियंत्रण रहेगा।
इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और मनमानी पर रोक लगेगी।
डिजिटल ट्रैकिंग से अधिकारियों को वास्तविक समय पर रिपोर्ट मिल सकेगी।

नतीजा– अगर समय पर कठोर कदम नहीं उठाए गए तो मासूम बच्चों का भविष्य और भी अंधेरे में धकेला जाएगा।
यह खबर स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है और सीधा संदेश देती है कि स्मार्ट मीटर से ज्यादा जरूरी है स्मार्ट और जिम्मेदार शिक्षक।