मरहीमाता मंदिर हादसा – चौथा शव भी मिला, एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत | जर्जर रास्ते और लापरवाही पर उठे सवाल

बिलासपुर और बलौदाबाजार की सीमा पर स्थित मरहीमाता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं के परिवार पर सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। अचानक उफनते नाले में बहकर चार लोगों की मौत हो गई। मंगलवार सुबह चौथा शव भी बरामद कर लिया गया।
हादसे में मारे गए लोग
मितान ध्रुव (5 वर्ष) – भाटापारा
मुस्कान ध्रुव (12 वर्ष) – भाटापारा
गौरव ध्रुव (13 वर्ष) – भाटापारा
बलराम ध्रुव (45 वर्ष) – परसदा, बिलासपुर
कैसे हुआ हादसा?
परिवार मंदिर से दर्शन कर लौट रहा था, तभी अचानक बारिश शुरू हुई और नाले का जलस्तर बढ़ गया। नाला पार करते समय चारों लोग बह गए। सोमवार को तीन शव मिल चुके थे जबकि मंगलवार सुबह बलराम ध्रुव का शव भी बरामद कर लिया गया।



राहत-बचाव में देरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि मरहीमाता मंदिर तक पहुंचने का मार्ग बेहद जर्जर और सड़क विहीन है। लाखों की संख्या में लोग हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन अब तक न तो सड़क बनी है, न ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
न तो यहां सुरक्षा के इंतज़ाम हैं, न ही आपदा की स्थिति में राहत-बचाव के लिए कोई स्थायी व्यवस्था।
हादसे के बाद रेस्क्यू टीम को मौके तक पहुंचने में दिक्कत हुई, जिससे राहत कार्य में देरी हुई।
ग्रामीणों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने ही सबसे पहले बचाव अभियान चलाया।
पहुंच मार्ग की बदहाली
मरहीमाता मंदिर मुख्यमार्ग से लगभग 3.5 किलोमीटर अंदर जंगल के बीचों-बीच स्थित है। यह इलाका प्राकृतिक सौंदर्य और आस्था का बड़ा केंद्र है, लेकिन आज तक यहां तक पहुंचने के लिए सड़क या पक्का मार्ग नहीं बन सका है।
श्रद्धालुओं को कच्चे रास्तों और नालों को पार करके मंदिर पहुंचना पड़ता है।
बरसात के दिनों में नाले उफान पर आ जाते हैं और जान का खतरा हमेशा बना रहता है।
न तो पुलिया बनाई गई, न ही सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के इंतज़ाम किए गए।
ग्रामीणों की लंबे समय से मांग
स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु मंदिर को पर्यटन क्षेत्र में शामिल करने और सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कई सालों से कर रहे हैं।
लाखों लोग हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं, फिर भी प्रशासन और सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
हादसे के बाद एक बार फिर लोगों में गहरी नाराज़गी है और ग्रामीणों ने कहा है कि अब और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लोगों में नाराज़गी
श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि जब यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है और हर साल लाखों लोग यहां पहुंचते हैं, तो अब तक विकास कार्य क्यों नहीं हुए?
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड और पुलिया जैसे इंतज़ाम क्यों नहीं किए गए?
हर साल बारिश में यहां इसी तरह खतरे की स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे रहता है।