सड़क कटाव से बरपाली-केंदा मार्ग पर बढ़ा खतरा, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
पानी के तेज बहाव से सड़क का हिस्सा बहा, सुरक्षा इंतजाम नदारद; जनप्रतिनिधियों के बयानों से गरमाया सड़क का मुद्दा
कोटा/बेलगहना। | आजाद भारत न्यूज़ पाण्डे की रिपोर्ट।
बिलासपुर जिले के कोटा जनपद पंचायत अंतर्गत बरपाली-केंदा मार्ग पर सड़क कटाव ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। पानी के तेज बहाव के कारण सड़क का एक हिस्सा कटकर बह गया है। इससे इस मार्ग से आवागमन करने वाले ग्रामीणों, किसानों और स्कूली बच्चों के सामने दुर्घटना का खतरा पैदा हो गया है। इसके बावजूद क्षतिग्रस्त स्थान पर अब तक बैरिकेड, सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संकेतक नहीं लगाए जाने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।

बरपाली-केंदा मार्ग आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। बरपाली, कुसुमखैरा और पहंदा सहित आसपास के गांवों के लोग रोजमर्रा के कामकाज, बाजार, खेती-किसानी और शिक्षा के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। क्षेत्र के कई विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए केंदा जाते हैं। ऐसे में सड़क का क्षतिग्रस्त होना केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।
सड़क का हिस्सा बहने से हादसे का खतरा
ग्रामीणों के अनुसार, पानी के तेज बहाव के कारण सड़क का एक हिस्सा कटकर बह गया है। इससे सड़क की मजबूती प्रभावित हुई है और मार्ग से गुजरने वाले लोगों को सावधानीपूर्वक आवागमन करना पड़ रहा है। यदि क्षतिग्रस्त हिस्से का समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो कटाव और बढ़ने की आशंका है। इससे मार्ग पर आवागमन बाधित होने के साथ आसपास के गांवों के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सबसे अधिक चिंता स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर है। प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले विद्यार्थियों को क्षतिग्रस्त सड़क के पास से होकर निकलना पड़ता है। रात के समय पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेतों के अभाव में खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए तत्काल सुरक्षा व्यवस्था करना आवश्यक है।
सुरक्षा इंतजामों की कमी पर उठे सवाल
सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बैरिकेड, सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संकेतक नहीं होने से स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सबसे पहले दुर्घटना की आशंका वाले स्थान पर अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि मरम्मत होने तक लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
इसके साथ ही संबंधित विभाग द्वारा सड़क का तकनीकी निरीक्षण कर कटाव के कारणों का पता लगाया जाए और क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत कराई जाए। पानी की निकासी और तेज बहाव से सड़क को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए भी उचित व्यवस्था की आवश्यकता है।
बैजनाथ पटेल ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के कोंचरा क्षेत्र के सदस्य बैजनाथ पटेल ने सड़क की स्थिति को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में न तो कांग्रेस पार्टी के विधायक और जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न ही भाजपा के सांसद एवं अन्य जनप्रतिनिधि। जब स्थानीय लोगों की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तो अब लोगों को दूसरे विकल्प तलाशने चाहिए।”
बैजनाथ पटेल के इस बयान से क्षेत्र में सड़क और बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का मुद्दा फिर सामने आया है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि सड़क जैसी आवश्यक सुविधा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की जाए।
कन्हैया गंधर्व बोले—कई बार उठाया है मुद्दा
कांग्रेस के जनप्रतिनिधि कन्हैया गंधर्व ने सड़क और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हमने इस मुद्दे को कई बार उठाया है। कोटा विधानसभा के साथ भाजपा हमेशा से भेदभाव करती आ रही है। इसका परिणाम है कि यहां की सड़कें, पुल-पुलिया और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकास से दूर हैं।”
गंधर्व ने क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया और अन्य आधारभूत संरचनाओं की स्थिति को लेकर असंतोष जताया। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए भेदभाव के आरोप राजनीतिक बयान हैं। सड़क की मौजूदा स्थिति में सुधार के लिए संबंधित विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
भाजपा मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत ने दिया आश्वासन
इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष, बेलगहना राजू सिंह राजपूत ने बताया कि सड़क की समस्या से लोक निर्माण विभाग को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने इस संबंध में लोक निर्माण विभाग को भी अवगत कराया है। जल्द ही इसे सुधारा जाएगा।”
उनके इस बयान के बाद अब लोगों की निगाहें संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग जल्द मौके का निरीक्षण करेगा और सड़क की मरम्मत के साथ सुरक्षा संबंधी आवश्यक इंतजाम भी करेगा।
ग्रामीणों की मांग—पहले सुरक्षा, फिर स्थायी मरम्मत
बरपाली, कुसुमखैरा, पहंदा और आसपास के गांवों के लोगों की प्रमुख मांग है कि सड़क कटाव वाले स्थान पर तत्काल बैरिकेड और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए। आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा रेलिंग और पानी की निकासी के लिए भी उचित व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में तेज बहाव के कारण सड़क को दोबारा नुकसान न पहुंचे।

ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और दैनिक जरूरतों के लिए सड़क संपर्क अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि मार्ग असुरक्षित रहता है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों और आम नागरिकों के आवागमन पर पड़ेगा।
अब कार्रवाई का इंतजार
बरपाली-केंदा मार्ग पर सड़क कटाव ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को उजागर किया है। जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग बयानों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कब शुरू होगी और दुर्घटना की आशंका को दूर करने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए जाएंगे।
अब देखना होगा कि लोक निर्माण विभाग और संबंधित प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं। फिलहाल, सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों सहित सभी राहगीरों को दुर्घटना के खतरे से बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
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