आइए जानें — भारतीय रेलवे का स्वदेशी सुरक्षा कवच “KAVACH” कैसे काम करता है 🚉🚇
आजाद भारत न्यूज़ विशेष रिपोर्ट–
भारतीय रेलवे, जो दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है, लगातार नई तकनीकों को अपनाकर सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है — “कवच” (KAVACH) — एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (Indigenous Automatic Train Protection System), जो देश को आत्मनिर्भर रेल तकनीक की दिशा में अग्रसर कर रही है।
कवच क्या है?
कवच एक इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा तंत्र है जिसे भारतीय रेलवे के Research Design and Standards Organisation (RDSO) द्वारा देश में ही विकसित किया गया है।
यह तकनीक ट्रेनों, ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम को आपस में जोड़ती है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना, टक्कर, या मानवीय गलती को रोका जा सके।
पूरा नाम: KAVACH – Automatic Train Protection System
विकसित किया गया: Indian Railways और RDSO द्वारा
परियोजना: Make in India के अंतर्गत
टेक्नोलॉजी पार्टनर: HBL Power Systems, Medha Servo Drives, Kernex Microsystems
कवच का उद्देश्य
कवच का मुख्य उद्देश्य रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित बनाना है। इसके तहत निम्नलिखित लक्ष्य रखे गए हैं —
1️⃣ टक्कर से बचाव (Collision Avoidance):
दो ट्रेनों के बीच न्यूनतम सुरक्षित दूरी बनाए रखता है।
2️⃣ सिग्नल तोड़ने की गलती रोकना (SPAD – Signal Passed at Danger):
यदि लोको पायलट गलती से लाल सिग्नल पार करने की कोशिश करता है, तो कवच तुरंत ट्रेन को रोक देता है।
3️⃣ गति नियंत्रण (Speed Regulation):
सिस्टम स्वतः निर्धारित सीमा से अधिक गति पर ट्रेन को रोक देता है।
4️⃣ मानव भूल (Human Error) को कम करना:
धुंध, थकान या विजिबिलिटी कम होने की स्थिति में भी यह प्रणाली ट्रेन को सुरक्षित दिशा देती है।
⚙️ कवच कैसे काम करता है?
कवच सिस्टम तीन मुख्य इकाइयों से मिलकर बना है —
1️⃣ लोकोमोटिव यूनिट (Loco Unit):
इंजन में लगाई जाती है, जो सिग्नल और अन्य ट्रेन की स्थिति से जुड़ी सूचना प्राप्त करती है।
2️⃣ ट्रैकसाइड यूनिट (Trackside Unit):
यह सिग्नल पोस्ट और ट्रैक पर लगती है, जो कवच सिस्टम के लिए आवश्यक डेटा भेजती और प्राप्त करती है।
3️⃣ टॉवर यूनिट (Radio Tower Unit):
GPS और रेडियो कम्युनिकेशन के जरिए ट्रेन और कंट्रोल सेंटर के बीच लगातार संपर्क रखती है।
जब ट्रेन किसी लाल सिग्नल के करीब पहुँचती है और पायलट गलती से आगे बढ़ने की कोशिश करता है,
तो कवच स्वचालित रूप से ब्रेक सिस्टम को सक्रिय करता है और ट्रेन को रोक देता है।

मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
✅ सिग्नल ओवररन से सुरक्षा:
यदि पायलट लाल सिग्नल पार करने की कोशिश करता है, तो ट्रेन स्वतः रुक जाती है।
✅ टक्कर रोकने की क्षमता:
दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करता है।
✅ ऑल-वेदर टेक्नोलॉजी:
धुंध, बारिश या रात के समय में भी सही दिशा और गति नियंत्रण।
✅ रियल टाइम मॉनिटरिंग:
कंट्रोल सेंटर से हर ट्रेन की लोकेशन, गति और स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है।
✅ स्वदेशी और किफायती:
यह पूरी तरह Make in India परियोजना का हिस्सा है और विदेशी सिस्टम की तुलना में बेहद सस्ता (लगभग ₹50 लाख प्रति किमी) है।
कवच का भविष्य और विस्तार
कवच प्रणाली फिलहाल दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) के कुछ मार्गों पर लागू की गई है —
जैसे सिकंदराबाद–गदवाल, वारंगल–विजयवाड़ा मार्ग।
रेलवे मंत्रालय ने घोषणा की है कि आने वाले वर्षों में इसे
देश के सभी महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर लागू किया जाएगा।
इससे रेल दुर्घटनाओं में भारी कमी और समयपालन (Punctuality) में सुधार की उम्मीद है।
भारतीय रेलवे का “कवच” न केवल तकनीकी उन्नति का प्रतीक है बल्कि यह भारत के Atmanirbhar Bharat अभियान का मजबूत उदाहरण भी है।
यह स्वदेशी तकनीक आने वाले समय में देश की रेल सुरक्षा को पूरी तरह से नया आयाम देने वाली है।

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