दुर्ग जिले में कथित अफीम की खेती को लेकर सियासत गरमाई, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उठाए गंभीर सवाल
आजाद भारत न्यूज़- दुर्ग छत्तीसगढ़-
दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ में सूखे नशे और अवैध मादक पदार्थों को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में कथित तौर पर अफीम की खेती होने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने राज्य सरकार और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने प्रदेश में बढ़ रहे सूखे नशे के कारोबार को लेकर गृह मंत्री से कई सवाल पूछे थे, लेकिन उन्हें स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब सामने आई इन तस्वीरों के बाद उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।



10 एकड़ खेत में अफीम की खेती का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में एक भाजपा नेता के लगभग 10 एकड़ खेत में अफीम के पौधे और फूल उगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अफीम के पौधों से ही कई प्रकार के अवैध मादक पदार्थों का निर्माण किया जाता है और यदि यह खेती अवैध रूप से की जा रही है तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने यह भी कहा कि सूखे नशे की तस्करी से जुड़े एक कथित नाम का प्रदेश में व्यापक रूप से जिक्र होता रहा है, लेकिन सरकार द्वारा जारी सूची में उसका नाम नहीं होने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

विधानसभा में भी उठा था मुद्दा
भूपेश बघेल ने अपने पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि विधानसभा में उन्होंने सूखे नशे के बढ़ते नेटवर्क पर सरकार से जानकारी मांगी थी। उनका कहना है कि उस दौरान गृह मंत्री द्वारा दिए गए जवाब में कई सवालों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, जिससे संदेह और गहरा गया।
कानून व्यवस्था पर भी उठे सवाल
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में सूखे नशे के बढ़ते मामलों के कारण कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि नशे का कारोबार युवाओं और समाज के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है और इस पर सख्ती से कार्रवाई होना आवश्यक है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक जिला प्रशासन, पुलिस या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं जिस भाजपा नेता के खेत का जिक्र किया जा रहा है, उनकी ओर से भी अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जांच की मांग तेज
इस मामले को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यदि तस्वीरों में दिखाई दे रही फसल वास्तव में अफीम की है और इसकी खेती बिना अनुमति के की जा रही है, तो यह नारकोटिक्स कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इन तस्वीरों में दिखाई दे रही फसल क्या है और इसमें किसी प्रकार की अवैध गतिविधि शामिल है या नहीं।
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