“पिछली घोषणाएं अधूरी, फिर मनाया जा रहा सुशासन तिहार,“वादे अधूरे, फिर सुशासन का ढोंग!”संदीप शुक्ला।
“एक साल बाद भी घोषणा अधूरी, फिर सुशासन तिहार की तैयारी”?????
आजाद भारत न्यूज़-
बिलासपुर/कोटा – छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार मनाया गया था, जिसमें कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई थीं।
इसी क्रम में वर्ष 2025 में कोटा विधानसभा के ग्राम खोँगसरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय राज्य मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद तोखन साहू की मांग पर बेलगहना में शासकीय महाविद्यालय खोलने की घोषणा की थी।
घोषणा के बाद भाजपा नेताओं में श्रेय लेने की होड़ मच गई थी। स्थानीय इकाई अध्यक्ष से लेकर जिला स्तर के नेताओं तक सभी ने इस घोषणा का श्रेय लेने का प्रयास किया। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी इस घोषणा पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ है। जब क्षेत्र की जनता इस संबंध में सवाल पूछती है, तो जिम्मेदार जनप्रतिनिधि संतोषजनक जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
कोटा जनपद के पूर्व जनपद अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन में अफसरशाही इस कदर हावी है कि मुख्यमंत्री की घोषणा को भी एक वर्ष बाद तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इससे स्पष्ट होता है कि अधिकारी मुख्यमंत्री की घोषणाओं को गंभीरता से नहीं लेते।
उन्होंने आगे कहा कि कोटा विधानसभा के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बेलगहना तहसील के अंतिम छोर से महाविद्यालय की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। इस कारण बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद छात्रों में उम्मीद जगी थी, जो अब एक वर्ष बाद धूमिल होती नजर आ रही है।

शुक्ला ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष की घोषणा पर कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिससे उच्च शिक्षा का पूरा एक बैच प्रभावित हुआ। वहीं, अब फिर से सरकारी संसाधनों का उपयोग कर सुशासन तिहार मनाने की तैयारी की जा रही है, जो “आगे पाठ, पीछे सपाट” जैसी स्थिति को दर्शाता है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक पिछली घोषणाओं को पूरा नहीं किया जाता, तब तक नया सुशासन तिहार मनाना अनुचित है। यदि 15 दिनों के भीतर महाविद्यालय खोलने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो कांग्रेस पार्टी द्वारा सुशासन तिहार का बहिष्कार करते हुए विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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