दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में अफीम ही अफीम-छत्तीसगढ़ में नशा का पर्दाफाश।
आजाद भारत न्यूज़ | क्राइम रिपोर्ट
जंगल किनारे 5 एकड़ में अफीम की खेती का खुलासा, डोडों में चीरा लगाकर तैयार की जा रही थी अफीम। पुलिस की बड़ी कार्यवाही।
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम खेती का बड़ा नेटवर्क सामने आ रहा है। दुर्ग जिले में करीब साढ़े 9 एकड़ में अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद अब बलरामपुर जिले में भी लगभग 5 एकड़ जमीन पर अफीम की फसल बरामद हुई है। यह खेती गांव से दूर जंगल के किनारे इस तरह की जा रही थी कि बाहरी लोगों को इसकी भनक तक न लगे।
जानकारी के अनुसार बलरामपुर जिले के त्रिपुरी क्षेत्र के सरनाटोली गांव के पास जंगल किनारे अफीम की खेती की जा रही थी। ग्रामीणों को खेत में लगे संदिग्ध पौधों पर संदेह हुआ, जिसके बाद इसकी शिकायत प्रशासन और पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच में पाया कि खेत में बड़े पैमाने पर अफीम के पौधे लगाए गए हैं।
मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि करीब 5 एकड़ में अफीम की फसल लहलहा रही थी। पौधों पर लगे डोडे पूरी तरह तैयार थे और उनमें चीरा भी लगाया जा चुका था, जिससे साफ है कि अफीम निकालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। प्रशासन ने मौके पर फसल को जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

दुर्ग में भी बड़ा खुलासा
इसी बीच दुर्ग जिले के सामोदा गांव में भी करीब साढ़े 9 एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आया है। यहां खेती को छिपाने के लिए खेत के चारों ओर बाउंड्री और गेट लगाए गए थे तथा सुरक्षा के लिए बाउंसर तक तैनात किए गए थे। अफीम के पौधों को मक्का, पपीता और केला की फसलों के बीच लगाया गया था ताकि यह सामान्य खेती जैसा दिखाई दे।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि अफीम के फल तीन दिन पहले ही कंटेनर के माध्यम से कहीं और भेज दिए गए थे। ग्रामीणों का दावा है कि इस क्षेत्र में पिछले चार वर्षों से इस तरह की खेती की जा रही थी, लेकिन किसी को इसकी जानकारी नहीं थी।

व्हाट्सएप फोटो से खुला राज
दुर्ग के मामले में यह खुलासा बेहद रोचक तरीके से हुआ। होली के दिन बच्चों द्वारा खेत में खींची गई फोटो गांव के व्हाट्सएप ग्रुप में डाली गई थी। सरपंच अरुण गौतम को पौधे संदिग्ध लगे तो उन्होंने गूगल पर तस्वीर मिलाई, जिसके बाद पता चला कि यह अफीम के पौधे हैं। इसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और पूरा मामला उजागर हो गया।

भाजपा नेता हिरासत में
दुर्ग मामले में पुलिस ने संदेह के आधार पर जमीन मालिक और भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार खेती में बाहर से मजदूर बुलाए गए थे। खंडवा से मजदूरों को अफीम की खेती के लिए लाया गया था, जबकि कपास की फसल की जिम्मेदारी राजस्थान के मजदूरों को दी गई थी। पुलिस ने दो राजस्थानी मजदूरों को भी हिरासत में लिया है।
ग्रामीणों के अनुसार इस खेती का संचालन विनायक ताम्रकार, उनके भाई विमल और ब्रजेश ताम्रकार द्वारा किया जा रहा था। जमीन प्रीति बाला और मधुमति ताम्रकार के नाम पंजीकृत बताई जा रही है।

कलेक्टर ने मांगी गिरदावरी रिपोर्ट
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि सूचना मिलने के बाद वे स्वयं पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने पटवारी से खेत की गिरदावरी रिपोर्ट भी मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सर्वे के दौरान खेत में किस फसल की जानकारी दर्ज कराई गई थी।
दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के मादक पदार्थ बरामद किए हैं। थाना पुलगांव पुलिस ने अवैध रूप से की जा रही अफीम की खेती का भंडाफोड़ करते हुए लगभग 8 करोड़ रुपये मूल्य की अफीम की फसल जब्त की है।
पुलिस की टीम ने सूचना के आधार पर खेत में दबिश दी, जहां बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही थी। मौके से अफीम के पौधों को जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई की गई।
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई है। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की अवैध खेती और मादक पदार्थों के कारोबार पर सख्त नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पूरे नेटवर्क की जांच शुरू
दुर्ग और बलरामपुर में लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद अब पुलिस और प्रशासन अवैध अफीम खेती के बड़े नेटवर्क की जांच में जुट गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि प्रदेश के कई इलाकों में इस तरह की खेती गुप्त रूप से की जा रही हो सकती है।
प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
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