उपवन क्षेत्रपाल के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों का वन शैक्षणिक भ्रमण, जनजातीय जीवन और वन प्रबंधन को करीब से समझा“परंपरा से प्रगति तक: लघु वनोपज और वन प्रबंधन को समझा।
आजाद भारत न्यूज़- खोंगसरा-कोटा- बिलासपुर।
प्रकृति की गोद में बसे इस समृद्ध वन क्षेत्र में आयोजित शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा अनुभव बन गया, जहां उन्होंने अतीत की परंपराओं और वर्तमान के आधुनिक वन प्रबंधन को एक साथ करीब से देखा और समझा। LCIT कॉलेज बिलासपुर के बी.एससी. विद्यार्थियों का यह भ्रमण केवल अध्ययन यात्रा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और पर्यावरण के संतुलन को समझने का जीवंत माध्यम साबित हुआ।

यह क्षेत्र वर्षों से जनजातीय समुदायों की जीवन रेखा रहा है। पहले जहां जंगल पूरी तरह से परंपरागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के आधार पर संचालित होते थे, वहीं आज भी उस परंपरा की झलक यहां स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। स्थानीय जनजातियां आज भी महुआ, तेंदूपत्ता, चार, हर्रा, बहेरा जैसे लघु वनोपज पर निर्भर हैं, लेकिन फर्क यह आया है कि अब इन संसाधनों के संग्रहण और विपणन में संगठित व्यवस्था और सरकारी सहयोग जुड़ गया है।
पहले वन से प्राप्त संसाधनों का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों और सीमित आय तक ही सीमित था, लेकिन अब लघु वनोपज समितियों और फेडरेशन के माध्यम से इनका वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन किया जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीणों की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उन्हें उनके उत्पादों का उचित मूल्य भी मिल रहा है। यह बदलाव इस क्षेत्र को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

वन क्षेत्र की एक और विशेषता इसकी समृद्ध जैव विविधता है। यहां घने जंगल, औषधीय पौधे, वन्य जीव और पक्षियों की विविध प्रजातियां पाई जाती हैं। पहले इन संसाधनों का संरक्षण पूरी तरह पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित था, लेकिन अब इसमें वैज्ञानिक वन प्रबंधन, संरक्षण योजनाएं और समुदाय की सहभागिता जुड़ गई है, जिससे पर्यावरण संतुलन और अधिक मजबूत हुआ है।
इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने यह भी समझा कि किस तरह आज वन विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बना रहे हैं।
उपवन क्षेत्रपाल नरेंद्र बैसवाड़े, वन प्रबंधक समायन सिंह और टीकाराम जायसवाल द्वारा पूरे भ्रमण को योजनाबद्ध तरीके से संचालित करते हुए विद्यार्थियों को हर पहलू की जानकारी दी गई।

इस पूरे कार्यक्रम की पहल LCIT कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अर्चना शुक्ला द्वारा की गई थी, जिनके अनुरोध पर यह भ्रमण संभव हो सका। वहीं, Ms. अरुणा कटकवार के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने इस अनुभव को गहराई से समझा और उससे जुड़ाव महसूस किया।
यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा अवसर रहा, जहां उन्होंने जाना कि वन केवल संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और आधुनिक विकास का संगम है। पुराने समय की प्राकृतिक समझ और आज की वैज्ञानिक सोच का यह मेल ही इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता है।
— आज़ाद भारत न्यूज़

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