जिला चिकित्सालय GPM में बड़ी लापरवाही, अवैध वसूली के आरोपों के बीच नवजात की मौत,कोटा में बैगा महिला की मौत, जिम्मेदार लापता??
आजाद भारत न्यूज़- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ़) — जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि अवैध वसूली, इलाज में देरी और बिजली व्यवस्था फेल होने के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई।
मरवाही ब्लॉक के बरौर निवासी तपेश्वर प्रसाद यादव अपनी 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी पल्लवी यादव को डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां उनके साथ यह दुखद घटना घटित हुई।
डॉक्टर पर अवैध वसूली के आरोप
पीड़ित परिवार के अनुसार, ड्यूटी पर मौजूद गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सुषमा विश्वास ने ब्लड टेस्ट के नाम पर ₹2800 की मांग की।
₹1000 PhonePe के माध्यम से “आरती परतोती” नामक महिला के खाते में ट्रांसफर
₹1800 नकद भुगतान
परिजनों का आरोप है कि पूरी रकम मिलने तक मरीज को ऑपरेशन थिएटर में नहीं ले जाया गया।

पैसे मिलने तक रुका इलाज?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि भुगतान से पहले ऑपरेशन शुरू नहीं किया गया।
परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने सरकारी अस्पताल में पैसे लेने पर सवाल उठाया, तो डॉक्टर ने उन्हें रेफर करने की धमकी दी।
जांच रिपोर्ट भी नहीं दी गई
ब्लड टेस्ट के नाम पर पैसे लिए गए
लेकिन कोई रिपोर्ट परिजनों को नहीं दी गई
इससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन का आरोप
परिवार का दावा है कि:
ऑपरेशन के दौरान तीन बार बिजली गुल हुई
कोई बैकअप व्यवस्था नहीं थी
अंततः मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन किया गया
यह दावा यदि सही पाया जाता है, तो यह स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
बयानों में विरोधाभास
परिजनों को पहले बताया गया कि बच्चा स्वस्थ है
लेकिन डिलीवरी के बाद कहा गया कि बच्चे की मौत 4 घंटे पहले ही हो चुकी थी
इस विरोधाभास ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

जिम्मेदारों के बयान
डॉ. सुषमा विश्वास ने इस मामले पर सीधे जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि बिना अनुमति वह कोई जानकारी साझा नहीं कर सकतीं।
वहीं, सिविल सर्जन देवेंद्र सिंह पैकरा ने कहा:
“मामले की जानकारी मिली है, वापस आने पर विधिवत जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।”
बड़े सवाल
क्या जिला अस्पताल में ब्लड जांच की सुविधा नहीं है?
सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पैसे क्यों लिए गए?
डिजिटल पेमेंट किसी निजी व्यक्ति के खाते में क्यों कराया गया?
बिना रिपोर्ट दिए पैसे लेने का क्या औचित्य है?
क्या अस्पताल में पावर बैकअप नहीं है?
कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग तेज हो गई है।

यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है।
जहां एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं लोगों का भरोसा तोड़ रही हैं।
इसी तरह का लापरवाही कोटा ब्लॉक के आमागोहन में भी हुआ जहां।स्वास्थ्य सुविधा नही मिलने से बैगा महिला की मौत हो गयी। जिसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से की गई लेकिन उनके निजी सहायक ने बताया कि वह अपने बेटी के शादी में व्यस्त है।??
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को नहीं मिल पा रही स्वास्थ्य सुविधा, उल्टी-दस्त से बैगा महिला की मौत
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