लगातार शिकायतों के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग, झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई तेज
आजाद भारत न्यूज़-प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट
कोटा, बिलासपुर।
क्षेत्र में लंबे समय से झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने की लगातार शिकायतों और मीडिया में समाचार प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. निखिलेश गुप्ता ने संदिग्ध झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक पुराने आदेश (30 अप्रैल 2026) में सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, सेक्टर पर्यवेक्षकों एवं आरएचओ को निर्देशित किया गया था कि क्षेत्र में कार्यरत झोलाछाप प्रैक्टिशनरों की जानकारी एवं दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनके विरुद्ध जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
इसी क्रम में 13 जुलाई 2026 को बीएमओ कार्यालय से एक स्पष्टीकरण पत्र भी जारी किया गया है। इसमें बेलगहना क्षेत्र के फागूराम केवट (एम.टी.) से एक दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। पत्र में उल्लेख है कि मीडिया के माध्यम से यह सूचना प्राप्त हुई है कि संबंधित व्यक्ति को फील्ड में प्रैक्टिस करने की बात कही गई है, जिसका ऑडियो भी उपलब्ध होने का दावा किया गया है। यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


इससे पहले बेलगहना सहित आसपास के क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर समाचार प्रकाशित हुए थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि बिना वैध चिकित्सकीय डिग्री एवं पंजीयन के मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
फोन कॉल में झोलाछाप का दावा, BMO ने किया खंडन
सूत्रों के अनुसार, झोलाछाप डॉक्टरों की शिकायतों की पड़ताल के दौरान मीडिया टीम के एक पत्रकार ने एक कथित झोलाछाप चिकित्सक से फोन पर बात की। बातचीत में संबंधित व्यक्ति ने दावा किया कि “मैं BMO साहब के अंडर में काम करता हूँ। उन्हें सब पता है। हम क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं, आप हमारी रोजी-रोटी पर लात मार रहे हैं।”
इस कथित ऑडियो के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। हालांकि, जब इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. निखिलेश गुप्ता से पक्ष लिया गया तो उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
BMO डॉ. निखिलेश गुप्ता ने कहा—
“हम ऐसे किसी भी झोलाछाप चिकित्सक को नहीं जानते। हमारे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार और झूठे हैं। हमने अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में कार्यरत ऐसे प्रैक्टिशनरों की जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। जिस व्यक्ति ने हमारे नाम का उल्लेख किया है, उसे भी स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है।”
अब इस पूरे मामले में सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में झोलाछाप द्वारा लगाए गए दावे गलत साबित होते हैं तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी, वहीं यदि जांच में किसी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही सामने आती है तो उस पर भी नियमानुसार कार्रवाई अपेक्षित होगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति भी झोलाछाप डॉक्टरों के फलने-फूलने का बड़ा कारण है। आरोप है कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में सरकारी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ निर्धारित समय तक उपलब्ध नहीं रहते, जिसकी शिकायतें लगातार बीएमओ कार्यालय तक पहुंचती रही हैं। दूर-दराज के गांवों में समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मजबूरी में लोग झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे तथाकथित चिकित्सक बिना पर्याप्त योग्यता के इलाज करते हैं, जिससे कई बार मरीजों की स्थिति और गंभीर हो जाती है। समय पर सही उपचार नहीं मिलने से बीमारी बढ़ जाती है और कई मामलों में मरीजों की मौत तक हो जाती है।
अब लगातार शिकायतों, मीडिया की सक्रियता और विभागीय संज्ञान के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भारत में बिना वैध पंजीकरण के चिकित्सा अभ्यास दंडनीय है और ऐसे मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। पूरे क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाकर अवैध क्लीनिकों को बंद कराया जाए और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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