आंगनबाड़ी साड़ी घोटाला: 500 की साड़ी में 90 लाख का खेल, जांच में खुल रही भ्रष्टाचार की परतें
रायपुर/छत्तीसगढ़ | आजाद भारत न्यूज़–
छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बांटी गई साड़ियों को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। 500 रुपये प्रति साड़ी की खरीद में भारी कमीशनखोरी और गुणवत्ता में गंभीर अनियमितताओं ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश की करीब 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं के लिए यूनिफॉर्म के रूप में साड़ियां खरीदी गईं।
प्रति साड़ी कीमत तय हुई: ₹500
कुल बजट: लगभग ₹9.7 करोड़
लेकिन जांच और शिकायतों के बाद खुलासा हुआ कि यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ खरीद नहीं, बल्कि कमीशन बांटने का खेल बन गई।
कमीशन का पूरा गणित
सूत्रों के मुताबिक इस सौदे में:
करीब 90 लाख रुपये तक कमीशन बंटा
एक प्रभावशाली अधिकारी (‘सिंह’ उपनाम) की भूमिका केंद्रीय बताई जा रही है
खरीद और सप्लाई दोनों प्रक्रियाओं में एक ही नेटवर्क का नियंत्रण रहा
आरोप है कि प्रपोजल से लेकर मंजूरी तक एक ही अधिकारी के प्रभाव में काम हुआ, जिससे नियमों की अनदेखी की गई।
साड़ी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
सरकारी मानकों के अनुसार:
साड़ी की लंबाई होनी चाहिए: 5.5 मीटर
लेकिन वास्तविकता में:
कई साड़ियां 5 मीटर या उससे भी कम निकलीं
कपड़े की गुणवत्ता इतनी खराब कि 1-2 धुलाई में धागे निकलने लगे
इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी गई।
हर मंच पर उठ रहे सवाल
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े जब भी किसी कार्यक्रम, बैठक या सार्वजनिक मंच पर पहुंच रही हैं,
मीडिया द्वारा साड़ी घोटाले पर सवाल पूछे जा रहे हैं
विपक्ष लगातार जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी सामने आ रही है
कई जगह मंत्री को सफाई देनी पड़ी कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है।
विपक्ष का हमला
विपक्ष का आरोप:
“यह सिर्फ खराब गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि बड़ा भ्रष्टाचार है”
मांग:उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
खादी बोर्ड की चेतावनी भी अनदेखी
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट किया था:
अच्छी गुणवत्ता की साड़ी की कीमत ₹718 से ₹860 के बीच होती है
₹500 में गुणवत्ता वाली साड़ी देना संभव नहीं
फिर भी विभाग ने उसी दर पर खरीद जारी रखी, जिससे संदेह और गहराया।

कैसे चला पूरा नेटवर्क?
सप्लाई का ठेका कुछ चुनिंदा सप्लायर्स को दिया गया
आरोप है कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर साठगांठ हुई
“आधा-आधा” मुनाफा बांटने की चर्चा सामने आई
बवाल के बाद एक्शन
जब मामला सार्वजनिक हुआ और कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू किया, तब:
राजनीतिक दबाव बढ़ा
विभाग को डैमेज कंट्रोल करना पड़ा
7 अप्रैल 2026 को नया आदेश जारी हुआ
जांच में यह पाया गया कि:
साड़ियों की लंबाई और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी
सरकार के नए निर्देश
सभी जिलों को निर्देश:
दोषपूर्ण साड़ियां वापस ली जाएं
एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजी जाए
नई साड़ियों की सप्लाई फिर से उसी एजेंसी को सौंपे जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बड़ा सवाल
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
90 लाख का कमीशन किस-किस तक पहुंचा?
क्या यह सिर्फ एक घोटाला है या पूरे सिस्टम की बीमारी?
आंगनबाड़ी जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि उन महिलाओं के साथ भी अन्याय है जो जमीनी स्तर पर सेवा दे रही हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और दोषियों पर कितनी कड़ी कार्रवाई होती है।
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