चीतल की मौत के 1 माह बाद भी कार्रवाई नहीं: वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल? वन मंत्री से हुई थी शिकायत।

खोंगसरा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | आज़ाद भारत न्यूज़ लाइव।
शिकायतें फाइलों में दबी, विभाग मौन
26 जुलाई 2025 को खोंगसरा वन परिक्षेत्र में रेल हादसे में एक नर चीतल की मौत हुई थी। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में वन्यजीवों की संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण की जांच के लिए एसडीओ कोटा को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह फाइल शिकायतों के ढेर में दब गई। ग्रामीणों और समाजसेवियों द्वारा वन मंत्री श्री केदार कश्यप को भी शिकायत भेजी गई थी, लेकिन अब वह भी भुला दी गई लगती है।



मौतों की सिलसिला और विभाग की लापरवाही
एक चीतल की संदिग्ध मौत के बाद वन्यजीव प्रोटोकॉल तोड़ते हुए पेट्रोल डालकर शव जलाया गया।
अगले ही दिन रेल ट्रैक पर एक चीतल की दर्दनाक मौत हुई।
खोंगसरा क्षेत्र में तेंदुआ देखे जाने की सूचना भी ग्रामीणों ने दी थी।
वनरक्षक कुंजबिहारी पोर्ते के कार्यक्षेत्र में चीतल की मौत पर खुले में पोस्टमार्टम और शव जलाने जैसी गंभीर अनियमितताएं हुईं।
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग ने केवल कुछ लोगों को नोटिस देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं
अब पूरे एक महीने बाद भी कोई ठोस कार्यवाही न होना वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
क्या विभाग केवल कागजी खानापूर्ति कर रहा है?
क्या वन्यजीवों की जान इतनी सस्ती हो गई है कि शिकायतें भी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई हैं?
जनता की मांग:
ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने एक बार फिर से खोंगसरा वन परिक्षेत्र को डिअरजोन(हिरण आरक्षित) क्षेत्र करने की मांग की है। साथ ही दोषी कर्मचारियों को तत्काल हटाने और नियमित ड्यूटी के लिए तैनाती की मांग की है।
