भालू हमले से घायल 60 वर्षीय जमुना यादव बोले – “जिंदगी तो बच गई, पर अब मुआवज़े के लिए भटकना पड़ रहा है”

आजाद भारत न्यूज़ स्पेशल रिपोर्ट–लमनी/छपरवा (बिलासपुर), 28 जुलाई 2025 का अपडेट साक्षात्कार।
अचानकमार टाइगर रिज़र्व क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम लमनी में हुए भालू हमले में ग्रामीण जमुना यादव (उम्र 60 वर्ष से ऊपर) बाल-बाल बचे।आइये इस भालू के घटना को जाने।

जमुना यादव ने आजाद भारत न्यूज़ को दिए विशेष साक्षात्कार में बताया –
“मैं रोज की तरह जानवर चराने गया था। तभी अचानक भालू सामने आ गया। जंगल मे लोग पिहरी तोड़ने गए थे, उनके साथ कुत्ते थे जिसे देखकर भालू डर गया, उसने मुझे दौड़ाया और दाएं हाथ में बुरी तरह काट लिया। उस समय मुझे लगा कि शायद अब मैं बच नहीं पाऊँगा। लेकिन हिम्मत करके मैंने हाथ से बचाव किया और जोर से धक्का दिया, तभी भालू भाग गया। आज मुझे लगता है जैसे मुझे जीवन दोबारा मिला है।”
गंभीर चोट और उपचार
हमले में जमुना यादव के दाएं हाथ पर गहरे घाव आए हैं, जो अभी धीरे-धीरे भर रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए दवाइयां दी हैं और फिलहाल उनकी स्थिति नियंत्रण में है।

जमुना यादव ने आजाद भारत न्यूज़ से कहा –
“भालू ने मेरे दाएं हाथ में गहरी चोट कर दी थी। धीरे-धीरे घाव भर रहे हैं, लेकिन अब मैं वन विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहा हूँ। लमनी-छपरवा की टीम ने मुझे कागज़ी प्रक्रिया के लिए खोंगसरा भेज दिया है। यह प्रक्रिया इतनी कठिन है कि हम जैसे ग्रामीण परेशान हो जाते हैं। सरकार को चाहिए कि इस मुआवज़े की प्रक्रिया को आसान बनाए।”
स्वास्थ्य स्थिति
डॉक्टरों के अनुसार जमुना यादव का दायां हाथ अभी पूरी तरह ठीक होने में समय लेगा, लेकिन वे खतरे से बाहर हैं।


वन विभाग की प्रतिक्रिया
वन विभाग की टीम ने कहा कि मुआवज़ा प्रकरण उनके नियमों के तहत कागज़ी औपचारिकताओं से गुजरकर ही स्वीकृत होता है। फिलहाल केस खोंगसरा रेंज में भेजा गया है, जहां से आगे की कार्रवाई होगी।
ग्रामीणों ने सरकार और विभाग से मांग की है कि ऐसे वन्यजीव हमले पीड़ितों के मुआवज़े की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाया जाए, ताकि पीड़ितों को आर्थिक सहारा जल्द मिल सके।
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रिपोर्ट: आजाद भारत संवाददाता, लमनी/छपरवा
वन विभाग की अपील
घटना के बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी करते हुए ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि जंगल के भीतर अकेले न जाएं, मवेशियों को चराते समय समूह में रहें, और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की सूचना तुरंत दें।