बिग ब्रेकिंग न्यूज़- “मानवाधिकार आयोग का बड़ा छापा: 100 से अधिक बच्चे बालमजदूरी में मिले, कई संचालकों पर FIR दर्ज
रायपुर/राज्य ब्यूरो। आजाद भारत न्यूज़ लाइव।
मानवाधिकार आयोग ने राज्य के कई जिलों में लगातार बढ़ रही बालमज़दूरी की शिकायतों पर विशेष संचालन अभियान चलाया। यह अभियान 3 दिन तक चला, जिसमें रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ जिलों के कुल 47 स्थानों पर छापेमारी की गई।
अभियान के दौरान टीम ने ढाबे, गैरेज, फैक्ट्रियाँ, होटल, बर्तन धुलाई स्थल, ईंट-भट्ठे और कबाड़ी केंद्रों में जाकर जांच की। जांच में 100 से अधिक बच्चे 8–15 वर्ष की आयु वर्ग में काम करते हुए पाए गए।

कैसे चला पूरा अभियान?
स्रोत: मानवाधिकार आयोग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट, जिला प्रशासन, श्रम विभाग अधिकारी
- पिछले महीनों में गुप्त रूप से शिकायतें मिलीं कि शहरों में मजदूर बस्तियों और बाजार क्षेत्रों के पास बालमजदूरी बढ़ रही है।
- आयोग की टीम ने बच्चों को खतरनाक कार्यों में लगाए जाने की रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और श्रम विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई की।
- कुछ स्थानों पर संचालकों ने छापा पड़ते ही बच्चों को छिपाने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उन्हें बरामद कर लिया।
- सबसे अधिक मामले नया बस स्टैंड क्षेत्र, पुराने स्टेशन रोड, औद्योगिक क्षेत्र और ट्रांसपोर्ट नगर से मिले। बच्चों की स्थिति देखकर अधिकारी भी दंग
छापे के दौरान कई बच्चे—
भारी बोरे ढोते,
बर्तन धोते,
मशीनों पर काम करते,
लोहे और कोयले के काम में लगे पाए गए।
कई बच्चों के हाथ-पैर पर चोट के निशान थे और वे लंबे समय से काम करते दिखे। कुछ बच्चे तो सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक काम कर रहे थे।
मानवाधिकार आयोग का बयान
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
“यह बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। बच्चे शिक्षा और खेल के माध्यम से अपना भविष्य बनाते हैं, न कि मजदूरी करके।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया गया है और बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
संचालकों पर कार्रवाई शुरू
14 प्रतिष्ठान सील
29 संचालकों पर FIR दर्ज
7 मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत भी कार्रवाई
श्रम विभाग द्वारा 2 लाख से 10 लाख तक का जुर्माना प्रस्तावित
प्रशासन ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे भी ऐसे अभियान नियमित रूप से चलेंगे।
बच्चे कहाँ के थे?
जांच में पता चला कि बच्चे—
उत्तर प्रदेश,
झारखंड,
बिहार,
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों
से लाए गए थे।
कई बच्चे बेहद गरीब परिवारों से हैं और उन्हें काम दिलाने के बहाने शहर भेजा गया।
आयोग की अपील
आयोग ने कहा कि—
“यदि किसी भी क्षेत्र में बालमज़दूरी दिखे, तो लोग तुरंत टोल-फ्री नंबर 1098 या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।”
आजाद भारत न्यूज़ का दृष्टिकोण– बालश्रम न सिर्फ कानूनन अपराध है बल्कि यह बच्चों से उनका बचपन, शिक्षा और भविष्य छीन लेने जैसा है। ऐसी कार्रवाइयाँ तब तक प्रभावी नहीं होंगी जब तक समाज भी आगे आकर इन्हें रोकने में सहयोग न करे।
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