February 19, 2026

कान्हा क्षेत्र में बैगा महिलाओं को पारंपरिक आभूषण निर्माण का प्रशिक्षण, आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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आजाद भारत न्यूज़-कान्हा किसली-मध्यप्रदेश

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र | समनापुर पंचायत | ग्राम बैगाटोला
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र अंतर्गत समनापुर पंचायत के ग्राम बैगाटोला में बैगा जनजाति की महिलाओं के लिए पारंपरिक आदिवासी आभूषण निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में गांव एवं आसपास के क्षेत्रों की 30 से अधिक बैगा महिलाएं भाग ले रही हैं।


यह प्रशिक्षण महिलाओं को आजीविका आधारित कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है, ताकि वे अपने पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को रोजगार से जोड़ सकें। कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों से पारंपरिक आभूषण तैयार करने की व्यावहारिक तकनीक सिखाई जा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं मिट्टी, टेराकोटा, लकड़ी, बाँस, बीज, सूखे फल, कौड़ी, घोंघे के खोल, पत्थर, मनके, मोती, रंगीन धागे, सूत तथा तांबा-पीतल जैसे पारंपरिक तत्वों का उपयोग कर सुंदर एवं विशिष्ट आभूषण तैयार कर रही हैं। इनमें मांग टीका, हार, झुमके, कंगन, कमरबंध सहित अन्य पारंपरिक आभूषण शामिल हैं, जो बैगा संस्कृति और प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं।


बैगा समुदाय की महिलाएं सदियों से जंगल और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन यापन करती आई हैं। वर्तमान समय में जब परंपरागत आजीविका के साधन सीमित हो रहे हैं, ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, आर्थिक सुरक्षा और आत्मसम्मान का मजबूत आधार बन रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे आभूषणों की गुणवत्ता यह दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर वे बाजार से जुड़कर अपनी स्थायी आजीविका सुनिश्चित कर सकती हैं।


जोहार पहुना फाउंडेशन की भूमिका
उल्लेखनीय है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जोहार पहुना फाउंडेशन द्वारा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। जोहार पहुना फाउंडेशन छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाकों में शिक्षा, ग्रामीण आजीविका, पर्यावरण संरक्षण एवं महिला उत्थान के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत एक सामाजिक संस्था है।
संस्था का उद्देश्य आदिवासी समुदायों को उनके पारंपरिक ज्ञान, संसाधनों और कौशल के माध्यम से सशक्त बनाना है। फाउंडेशन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बाल शिक्षा एवं शिक्षकों के सहयोग, ग्रामीण आजीविका के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण, हस्तशिल्प एवं उद्यमिता विकास, पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता एवं प्राकृतिक संसाधन आधारित पहल तथा महिला उत्थान के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।


हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के सहयोग से जोहार पहुना फाउंडेशन द्वारा विभिन्न प्रशिक्षण एवं विकास कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समुदायों को स्थायी रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि जब कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) और जमीनी स्तर पर कार्यरत संस्था साथ मिलकर काम करती हैं, तो आदिवासी महिलाओं के जीवन में सकारात्मक और दीर्घकालिक परिवर्तन संभव हो पाता है।

प्रशिक्षण के दौरान विदेशी पर्यटकों को आभूषण खूब पसंद आया।

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