खोंगसरा-टेंगनमाड़ा के बीच सुखनाला में भालू की मौत, वन्यजीव संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल
प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट | आज़ाद भारत न्यूज़
बिलासपुर वन्य परिक्षेत्र।
खोंगसरा-टेंगनमाड़ा के बीच स्थित सुखनाला में एक वृद्ध भालू मृत अवस्था में मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। घटना की सूचना स्थानीय ग्रामीणों एवं पत्रकारों द्वारा वन विभाग को दी गई। मौके पर पहुंचने में हुई देरी और जिम्मेदारी को लेकर विभागीय स्तर पर सामने आई असमंजस की स्थिति ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भालू पिछले कई महीनों से भोजन और पानी की तलाश में जंगल से निकलकर तेंदूपत्ता फड़ों और आसपास की बस्तियों में भटकता दिखाई देता था। ग्रामीणों के अनुसार भालू की उम्र अधिक थी तथा उसे सुनने में भी परेशानी थी। ऐसे में वह लगातार अकेला भटकता रहा और उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई।
सूत्रों के अनुसार, सूचना मिलने पर वन विभाग के एक कर्मचारी ने यह कहते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि “यह हमारा क्षेत्र नहीं, निगम लिमिटेड का क्षेत्र है।” स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार कर्मचारी अक्सर फील्ड में मौजूद नहीं रहते। इससे पहले वन कटाई की शिकायतों पर भी समय पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगते रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि वन विभाग ने समय रहते भालू की निगरानी कर उसका रेस्क्यू कर सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरण किया होता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, भालू की मौत का वास्तविक कारण अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है और इसका खुलासा पोस्टमार्टम एवं वन विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।


लगातार हिरण, तेंदुआ और अब भालू की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्र के लोगों ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए नियमित मॉनिटरिंग, रेस्क्यू टीम की सक्रियता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मानव और वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना, वन्यजीवों के लिए पर्याप्त जल एवं भोजन की व्यवस्था करना तथा घायल या कमजोर वन्यजीवों का समय पर उपचार और रेस्क्यू सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
अब सभी की निगाहें वन विभाग की जांच पर टिकी हैं। सवाल यह भी है कि क्या लगातार हो रही वन्यजीवों की मौतों पर राज्य सरकार और वन मंत्री गंभीर पहल करेंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके?
प्रदीप पांडेय(रिपोर्टर)
आज़ाद भारत न्यूज़
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