अनावरण के एक साल में ही जर्जर हुई डॉ. भंवर सिंह पोर्ते की प्रतिमा, सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रशासन और जिम्मेदारों पर उठाए सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। आजाद भारत न्यूज़-प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट-
छत्तीसगढ़ के महान आदिवासी जननायक, पूर्व मंत्री एवं आदिवासी समाज के अधिकारों की बुलंद आवाज रहे डॉ. भंवर सिंह पोर्टे की प्रतिमा अनावरण के लगभग एक वर्ष के भीतर ही जर्जर होती नजर आ रही है। प्रतिमा के कई हिस्सों से रंग और ऊपरी परत उखड़ने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
नगर पालिका परिषद गौरेला द्वारा वार्ड क्रमांक 14 में स्थापित इस प्रतिमा का अनावरण 4 जुलाई 2025 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया था। इस अवसर पर क़ई विधायक सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे थे। प्रतिमा को आदिवासी समाज के गौरव और डॉ. पोर्ते के योगदान के सम्मान में स्थापित किया गया था।



अब प्रतिमा की जर्जर होती स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता किशन ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए जिम्मेदार विभाग और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि डॉ. भंवर सिंह पोर्टे जैसे महान आदिवासी जननायक के सम्मान में स्थापित प्रतिमा उनके व्यक्तित्व और योगदान के अनुरूप उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए थी, लेकिन एक वर्ष के भीतर ही उसमें खराबी दिखाई देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने मांग की है कि प्रतिमा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण एजेंसी, ठेकेदार अथवा संबंधित अधिकारियों की लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने का मामला नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान, इतिहास और महान जननायक की स्मृति से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से प्रतिमा का तत्काल जीर्णोद्धार कराने अथवा आवश्यकता पड़ने पर उच्च गुणवत्ता वाली नई प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है, ताकि डॉ. भंवर सिंह पोर्ते के प्रति समाज की श्रद्धा और सम्मान अक्षुण्ण बना रहे।
प्रतिमा की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि हाल ही में स्थापित प्रतिमा इतनी कम अवधि में खराब होने लगी है, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।


अब उठ रहे हैं ये सवाल…
क्या प्रतिमा निर्माण में गुणवत्ता संबंधी मानकों का पालन किया गया था?
निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कब होगी?
यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी पर कार्रवाई होगी?
क्या महान आदिवासी जननायक की प्रतिमा का जल्द जीर्णोद्धार कराया जाएगा?


अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और डॉ. भंवर सिंह पोर्टे के सम्मान से जुड़े इस मुद्दे पर कब तक कार्रवाई होती है।
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