छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल में बच्चों से ट्रांसफार्मर इंस्टॉलेशन! बच्चों की जान खतरे में डाला, बिलासपुर की घटना।

तख़तपुर ब्लॉक के सरकारी हाई स्कूल चनाडोंगरी में मासूम छात्रों की जान से खिलवाड़ – न हेलमेट, न ग्लव्स, हाई वोल्टेज के बीच ‘प्रैक्टिकल’ करवा दिया
बिलासपुर/तख़तपुर। शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले स्कूल में इन दिनों किताब-कॉपी की जगह ‘करंट वाला प्रैक्टिकल’ चल रहा है। बिलासपुर ज़िले के तख़तपुर ब्लॉक स्थित सरकारी हाई स्कूल चनाडोंगरी में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, स्कूल परिसर में ट्रांसफार्मर इंस्टॉलेशन के दौरान ठेकेदार या बिजली विभाग की टीम ने बच्चों को ही रस्सी खींचने और सहायक कार्यों में लगा दिया। इस दौरान बच्चों ने बिना सुरक्षा हेलमेट, ग्लव्स या सेफ़्टी गियर के हाई वोल्टेज के नज़दीक काम किया।
क्या था मामला?
ट्रांसफार्मर की स्थापना के लिए भारी केबल और उपकरण लाने-ले जाने का काम हो रहा था।
कुछ बच्चों को रस्सी खींचकर खंभे के सहारे तार खींचने का निर्देश दिया गया।
बच्चे स्कूल यूनिफ़ॉर्म में ही यह काम करते नज़र आए।
आसपास कोई सेफ़्टी बैरियर या चेतावनी बोर्ड नहीं था।
खतरे की गंभीरता
बिजली सुरक्षा नियमों के तहत, हाई वोल्टेज उपकरणों के पास केवल प्रशिक्षित व प्रमाणित व्यक्ति ही काम कर सकते हैं।
इस तरह बच्चों को कार्य में शामिल करना:
जानलेवा दुर्घटना का खतरा पैदा करता है।
विद्युत अधिनियम 2003 और श्रम कानूनों का उल्लंघन है।
बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस घटना पर कड़ी नाराज़गी जताई।
एक अभिभावक ने कहा – “हम बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, न कि उनकी जान जोखिम में डालने के लिए। ये लापरवाही माफ़ नहीं की जा सकती।”
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
मामले में बिजली विभाग और शिक्षा विभाग दोनों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं—
क्या प्रशासन को पता था कि स्कूल में इंस्टॉलेशन के समय बच्चे मौजूद होंगे?
कार्य के दौरान स्कूल प्रशासन ने सुरक्षा इंतज़ाम क्यों नहीं करवाए?
ठेकेदार पर कोई निगरानी क्यों नहीं रखी गई?
जांच और कार्रवाई की मांग
शिक्षा विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला गंभीर लापरवाही और बाल अधिकार उल्लंघन का है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है:
1. घटना की तत्काल जांच कराई जाए।
2. दोषी अधिकारियों, ठेकेदार और जिम्मेदार व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
3. बच्चों की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
हम मानते हैं कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का भविष्य संवारना है, न कि उन्हें खतरे में डालना। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही की गहरी तस्वीर पेश करता है, जिस पर तुरंत संज्ञान लिया जाना चाहिए।