मस्ती की पाठशाला: कान्हा नेशनल पार्क के स्कूलों में खिलौना पुस्तकालय की शुरुआत।

कान्हा नेशनल पार्क से सटे ग्रामीण इलाकों में बच्चों की शिक्षा को और रोचक व सार्थक बनाने के लिए Earth Focus Foundation और Pagaria Welfare Foundation ने एक सराहनीय पहल की है। इसके तहत 11 स्कूलों में Toy Library (खिलौना पुस्तकालय) की शुरुआत की गई है, जिसे विशेष रूप से “मस्ती की पाठशाला” नाम दिया गया है।


इस पहल के पीछे उद्देश्य है कि बच्चे खेल-खेल में सीखें, शिक्षा को बोझ न समझें और उनकी रचनात्मक क्षमताओं का विस्तार हो। खिलौना पुस्तकालय में ऐसे शैक्षिक खिलौने रखे गए हैं, जिनसे बच्चों का मानसिक विकास, तार्किक सोच, रचनात्मकता, और सामाजिक सहयोग की भावना बढ़ती है।
कार्यक्रम की खास बातें
बच्चों को तरह-तरह के शैक्षिक खिलौनों से खेलने और सीखने का मौका।
सीखने को मज़ेदार बनाने के लिए Earth Focus Foundation की शिक्षा टीम द्वारा तैयार की गई विशेष गतिविधियाँ।
बच्चों के बीच आपसी सहयोग, समूह में खेलने और साझा करने की आदत विकसित होना।
स्कूल आने की बच्चों की नियमितता में सकारात्मक बढ़ोत्तरी।
कार्यक्रम समन्वयक प्रशांत परसाई का कहना
“हमने इस नवाचार को पहले एक स्कूल में लागू किया था। वहां बच्चों में बड़ा बदलाव देखा गया। वे न केवल ज्यादा उत्साह से पढ़ने आने लगे, बल्कि समूह में खेलने से उनका सामाजिक और मानसिक विकास भी हुआ। बच्चों में सहयोग की भावना जागी और वे अधिक आत्मविश्वासी बने। इस सकारात्मक परिणाम को देखते हुए अब इसे 11 स्कूलों में लागू किया गया है। हमारा विश्वास है कि आने वाले समय में इसका विस्तार और भी अधिक स्कूलों में किया जाएगा।”

जिन स्कूलों में खिलौना पुस्तकालय की शुरुआत हुई- मंजीटोला,लगमा,भीमा,बासिनखार,गुदमा,सहेगांव,बेहराखार,बम्हनी,करेली,गोरखपुर,बलगांव

बच्चों और समुदाय पर असर
इस पहल ने बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने का एक नया माध्यम दिया है। पहले जहाँ कई बच्चे स्कूल को केवल पढ़ाई की जगह मानते थे, अब वे इसे खेल-खेल में सीखने का केंद्र मानने लगे हैं। इससे ग्रामीण समुदायों में भी शिक्षा को लेकर सकारात्मक माहौल बना है। अभिभावक अब बच्चों की नियमित उपस्थिति और उनकी प्रगति देखकर अधिक सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं।

✨ भविष्य की योजना
संस्थाओं का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इस नवाचार को और अधिक गाँवों और स्कूलों में फैलाया जाए, ताकि हर बच्चा शिक्षा को आनंद और उत्साह के साथ प्राप्त कर सके।
यह प्रयास साबित कर रहा है कि यदि शिक्षा में नवाचार और मनोरंजन को जोड़ा जाए तो ग्रामीण बच्चों की सीखने की रुचि और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
विशेष रिपोर्ट- प्रदीप शर्मा(प्रधान संपादक-आजाद भारत न्यूज़ लाइव
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