जोहार पहुना फाउंडेशन ने स्थापना दिवस पर बांटी स्वच्छता किट, किया पौधारोपण और वन्यजीव संरक्षण का संदेश

“जोहार पहुना फाउंडेशन का स्थापना दिवस: “केंवची के बैगापारा में छात्रों को शिक्षा सामग्री, किशोरियों को स्वच्छता किट, फलदार पौधों का वितरण और ‘हाथी मेरे साथी’ कार्यक्रम के जरिए वन्यजीव संरक्षण का संदेश”
आजाद भारत न्यूज़ लाइव- (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) बिलासपुर-
जोहार पहुना फाउंडेशन ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर विकासखंड के अंतिम आदिवासी ग्राम पंचायत केंवची के बैगापारा बस्ती में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान समुदाय को स्वच्छता, शिक्षा, वन्यजीव संरक्षण और आजीविका सुदृढ़ीकरण के प्रति जागरूक किया गया।


स्थापना दिवस का महत्व
जोहार पहुना फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के आदिवासी और ग्रामीण अंचलों में शिक्षा, ग्रामीण आजीविका, जैव विविधता संरक्षण और मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संगठन ने जंगल पर निर्भर परिवारों के लिए वैकल्पिक आय स्रोत विकसित करने, कौशल विकास प्रशिक्षण, बालवाड़ी और प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार, तथा पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय पहल की है। स्थापना दिवस को संगठन समाज के बीच रहकर सार्थक कार्यों के साथ मनाता है, ताकि समुदाय के साथ सीधा संवाद और सहयोग बढ़े।


स्वच्छता किट और शिक्षा सामग्री वितरण
कार्यक्रम में 50 से अधिक छात्र-छात्राओं को पढ़ाई-लिखाई की सामग्री और स्वच्छता किट वितरित की गई, जिसमें ब्रश, जीबी कोलगेट, साबुन, हैंडवाश, तेल आदि शामिल थे। किशोरी बालिकाओं को मासिक स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए सेनेटरी पैड के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी गई।


फलदार पौधों का वितरण और जिम्मेदारी
कार्यक्रम के अंतर्गत समुदाय के सदस्यों को फलदार पौधे प्रदान किए गए और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। बैगा बस्ती में पानी की समस्या पर चर्चा करते हुए ग्रामीणों को उबालकर पानी पीने की सलाह दी गई, जिससे पानी जनित बीमारियों से बचाव हो सके।

शिक्षा और आजीविका पर जोर
शिक्षा के महत्व पर बातचीत करते हुए 2 शाला-त्यागी बच्चों को पुनः विद्यालय जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया और उन्हें अध्ययन किट प्रदान की गई। ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने के लिए महिलाओं और पुरुषों की एक समिति बनाई गई, जिसके माध्यम से आगे कौशल-आधारित प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।
वन्यजीव संरक्षण और ‘हाथी मेरे साथी’ कार्यक्रम
जोहार पहुना फाउंडेशन ने बच्चों और समुदाय को वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रेरित किया और वनों की रक्षा का संकल्प दिलाया। ‘हाथी मेरे साथी’ कार्यक्रम के तहत हाथियों से सुरक्षा और सावधानी बरतने के उपाय बताए गए। वन्यजीवों की सूचना देने के लिए एक समिति गठित की गई और एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, वन समिति सदस्य और गांव के सक्रिय लोग शामिल किए गए हैं।

उपस्थिति
कार्यक्रम में जोहार पहुना फाउंडेशन के निदेशक किशन लाल, सदस्य विजय यादव, अरुण राजपूत, तुकाराम बघेल, सागर, राहुल, अनिता यादव, प्रदीप पांडेय, दुर्गेश जैसवाल सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।